{"_id":"1b1f75fa7c697eb5d9a86a565df0a140","slug":"angry-people-commotion-at-the-office-of-naib","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुस्साए लोगों का नायब तहसीलदार कार्यालय पर हंगामा","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
गुस्साए लोगों का नायब तहसीलदार कार्यालय पर हंगामा
Jind
Updated Sat, 10 May 2014 01:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नायब तहसीलदार कार्यालय में शुक्रवार को जमीन की रजिस्ट्री और अन्य काम के लिए आए लोगाें का गुस्सा उस वक्त फूट गया जब कई घंटे के इंतजार के बाद दोपहर को भी पिल्लूखेड़ा के नायब तहसीलदार सूरजभान कार्यालय में नहीं पहुंचे। गुस्साए लोगों ने नायब तहसीलदार के कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को कार्यालय के अंदर ही रोककर कार्यालय के दरवाजे पर कुंडी लगाकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिया और जमकर बवाल काटा। गुस्साए लोगों ने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार का कार्यालय में न आने का समय निश्चित है और न जाने का।
वह सप्ताह में कभी कभार ही कार्यालय में पहुंचते हैं। नायब तहसीलदार की इस कार्यप्रणाली के कारण लोगों के सरकारी काम अधर में लटके रहते हैं। यहां जमीन की रजिस्ट्री कराने और अन्य कामकाज से आने वाले लोगों को घंटों इंतजार करने के बाद भी बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ता है। बाद में कार्यालय में लोगों के हंगामा करने की सूचना पर नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे और लोगों को समझाबुझा कर शांत किया।
पिल्लूखेड़ा के नायब तहसीलदार कार्यालय के बाहर हंगामा कर रहे विकास, नरवीर, सुरेंद्र, इंद्र सिंह, बनी सिंह, वजीर, धनपत इत्यादि ने नायब तहसीलदार सूरजभान पर आरोप लगाते हुए कहा कि नायब तहसीलदार के कार्यालय में न तो आने का समय निर्धारित है और न जाने का। इस कारण लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई-कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
विज्ञापन
उन्हाेंने बताया कि यहां तो हालात ऐसे हैं कि नायब तहसीलदार के कार्यालय में आने के समय के बारे में खुद उनके पीए तक को भी जानकारी नहीं होती, जब वह उनसे साहब के आने के बारे में पूछते हैं तो वह भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। इसके कारण लोगों को यहां घंटाें इंतजार करना पड़ता है। वजीर, धनपत सिंह, इंद्र सिंह सुरेंद्र ने बताया कि उन्हें जमीन की रजिस्ट्री करानी थी और यहां पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए सप्ताह में बुधवार और शुक्रवार दो दिन निर्धारित किए गए हैं। बुधवार को जब वह यहां रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो उस दिन भी साहब का कोई अता-पता नहीं था। जब इस बारे में उन्होंने उनके पीए से पता किया तो उन्होंने भी उन्हें कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद जब वह शुक्रवार को यहां रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचे तो भी साहब यहां नहीं मिले। यहां मौजूद कर्मचारी पहले उन्हें यह कहकर गुमराह करते रहे कि साहब किसी मीटिंग में गए हैं और दोपहर तक आ जाएंगे, लेकिन दोपहर बाद भी वह कार्यालय में नहीं आए।
नायब तहसीलदार के दोपहर बाद भी कार्यालय में नहीं पहुंचने पर लोगाें का गुस्सा फुट पड़ा और गुस्साए लोगों ने दोपहर लगभग सवा दो बजे नायब तहसीलदार कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को कार्यालय के अंदर ही रोककर कार्यालय के दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगाकर दरवाजा बंद कर दिया और काफी देर तक यहां बवाल काटा। बाद में लोगाें द्वारा हंगामा किये जाने की सूचना पाकर नायब तहसीलदार सूरजभान मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाबुझा कर शांत किया।
सुबह वह रजिस्ट्री के काम निपटाने के लिए कानूनगो के साथ निशानदेही के लिए फिल्ड में चले गए थे। दोपहर को उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोगों ने कार्यालय में मौजूद कंप्यूटर आपरेटर को कार्यालय के अंदर बंद कर दिया है और बाहर से दरवाजे पर कुंडी लगा दी। जब वह मौके पर पहुंचे तो दरवाजा बाहर से बंद था। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कुंडी लगाने का कारण पूछा तो वहां मौजूद लोगों ने एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया। यह कुछ शरारती लोगों का काम था। वह नियमित रूप से कार्यालय में जाते हैं और कार्यालय का कामकाज निपटाने के बाद फिल्ड में चले जाते हैं।
सूरजभान, नायब तहसीलदार, पिल्लूखेड़
विज्ञापन
वह सप्ताह में कभी कभार ही कार्यालय में पहुंचते हैं। नायब तहसीलदार की इस कार्यप्रणाली के कारण लोगों के सरकारी काम अधर में लटके रहते हैं। यहां जमीन की रजिस्ट्री कराने और अन्य कामकाज से आने वाले लोगों को घंटों इंतजार करने के बाद भी बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ता है। बाद में कार्यालय में लोगों के हंगामा करने की सूचना पर नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे और लोगों को समझाबुझा कर शांत किया।
विज्ञापन
पिल्लूखेड़ा के नायब तहसीलदार कार्यालय के बाहर हंगामा कर रहे विकास, नरवीर, सुरेंद्र, इंद्र सिंह, बनी सिंह, वजीर, धनपत इत्यादि ने नायब तहसीलदार सूरजभान पर आरोप लगाते हुए कहा कि नायब तहसीलदार के कार्यालय में न तो आने का समय निर्धारित है और न जाने का। इस कारण लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई-कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
विज्ञापन
उन्हाेंने बताया कि यहां तो हालात ऐसे हैं कि नायब तहसीलदार के कार्यालय में आने के समय के बारे में खुद उनके पीए तक को भी जानकारी नहीं होती, जब वह उनसे साहब के आने के बारे में पूछते हैं तो वह भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। इसके कारण लोगों को यहां घंटाें इंतजार करना पड़ता है। वजीर, धनपत सिंह, इंद्र सिंह सुरेंद्र ने बताया कि उन्हें जमीन की रजिस्ट्री करानी थी और यहां पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए सप्ताह में बुधवार और शुक्रवार दो दिन निर्धारित किए गए हैं। बुधवार को जब वह यहां रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो उस दिन भी साहब का कोई अता-पता नहीं था। जब इस बारे में उन्होंने उनके पीए से पता किया तो उन्होंने भी उन्हें कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद जब वह शुक्रवार को यहां रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचे तो भी साहब यहां नहीं मिले। यहां मौजूद कर्मचारी पहले उन्हें यह कहकर गुमराह करते रहे कि साहब किसी मीटिंग में गए हैं और दोपहर तक आ जाएंगे, लेकिन दोपहर बाद भी वह कार्यालय में नहीं आए।
नायब तहसीलदार के दोपहर बाद भी कार्यालय में नहीं पहुंचने पर लोगाें का गुस्सा फुट पड़ा और गुस्साए लोगों ने दोपहर लगभग सवा दो बजे नायब तहसीलदार कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को कार्यालय के अंदर ही रोककर कार्यालय के दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगाकर दरवाजा बंद कर दिया और काफी देर तक यहां बवाल काटा। बाद में लोगाें द्वारा हंगामा किये जाने की सूचना पाकर नायब तहसीलदार सूरजभान मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाबुझा कर शांत किया।
सुबह वह रजिस्ट्री के काम निपटाने के लिए कानूनगो के साथ निशानदेही के लिए फिल्ड में चले गए थे। दोपहर को उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोगों ने कार्यालय में मौजूद कंप्यूटर आपरेटर को कार्यालय के अंदर बंद कर दिया है और बाहर से दरवाजे पर कुंडी लगा दी। जब वह मौके पर पहुंचे तो दरवाजा बाहर से बंद था। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कुंडी लगाने का कारण पूछा तो वहां मौजूद लोगों ने एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया। यह कुछ शरारती लोगों का काम था। वह नियमित रूप से कार्यालय में जाते हैं और कार्यालय का कामकाज निपटाने के बाद फिल्ड में चले जाते हैं।
सूरजभान, नायब तहसीलदार, पिल्लूखेड़