तुरंत मदद के लिए हाजिर होगा एम्बुलेंस ड्रोन
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हार्ट अटैक की स्थिति में तुरंत मदद न मिल पाने के कारण बहुत से लोग असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। भारत समेत यह पूरी दुनिया की समस्या है।
इन हालातों से निपटने के लिए एक डच स्टूडेंट एलेक मोमोंट ने एम्बुलेंस ड्रोन जैसा दिखने वाला फ्लाइंग डीफाइब्रीलेटर तैयार किया है। एलेक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं।
19 हजार डॉलर की कीमत वाली यह डिवाइस एमरजेंसी मोबाइल कॉल ट्रैक करती है और जीपीएस के जरिए अपने गंतव्य की ओर बढ़ने लगती है। इसे चला रहे ऑपरेटर्स ऑन बोर्ड कैमरे के जरिए मरीज को देख सकते हैं, उससे बात कर सकते हैं और उसे परामर्श भी दे सकते हैं।
इस तरह होता है काम
फ्लाइंग डीफाइब्रीलेटर डिवाइस 12 वर्ग किलोमीटर की रेंज में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकती है।
एक मिनट में यह डिवाइस मरीज के पास उड़कर पहुंच जाती है, जिससे उसके बचने की संभावनाएं 8 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाती हैं। इमरजेंसी सर्विसेस के पीले रंग से रंगा यह प्रोटोटाइप ड्रोन 6 प्रोपेलर्स से चलता है और एक बार में 4 किलोग्राम सामान ले जा सकता है।
फिलहाल यहां इसका इस्तेमाल डीफाइब्रिलेटर ले जाने में हो रहा है। मोमोंट का कहना था, ′यूरोपियन यूनीयन में लगभग आठ लाख लोग हार्ट अटैक का शिकार होते हैं, जिसमें से आठ फीसदी ही बच पाते हैं। इसकी मुख्य वजह आपात सुविधाओं में मिलने वाली देरी है।′ इन स्थितियों में मरीज की जान बचाने में ऐसे डिवाइस से काफी मदद मिल सकती है।