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ऑल इंडिया सर्विस रूल
अमर उजाला दिल्ली
Updated Tue, 07 Jan 2014 07:26 PM IST
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केंद्र सरकार का कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग आईएएस अधिकारियों के सर्विस रूल में बदलाव की तैयारी में है। आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन के बाद ही यह मुद्दा उठा था।
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अखिल भारतीय सेवाएं ऑल इंडिया सर्विस ऐक्ट, 1951 के अधीन आती हैं और इसी कानून के तहत इनके लिए संवर्ग, आचरण एवं अनुशासन व अपील संबंधी नियम बनाए गए हैं। इन सेवाओं में आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा), आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) एवं आईएफएस (भारतीय वन सेवा) के अधिकारी आते हैं। इन तीनों सेवाओं के पदों के लिए इन्हीं संवर्गों के अधिकारियों की नियुक्ति हो सकती है।
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हालांकि राज्य सेवाओं से प्रोन्नति के जरिये भी इन पदों पर नियुक्ति का प्रावधान है। इनकी नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिये राष्ट्रपति द्वारा होती है, और उन्हें सेवा से हटाने का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास ही है। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकारों के पास सीमित अधिकार हैं। इन अधिकारियों की प्रोन्नति पर विचार (राज्यों में भी) विभागीय समिति द्वारा ही किया जाता है, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग एवं केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
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ब्रिटिशकालीन कानून गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट, 1935 में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को मौके पर त्वरित फैसले लेने के मद्देनजर काफी अधिकार दिए गए थे। आजादी के बाद उन कानूनी प्रावधानों को संविधान में इसलिए शामिल किया गया, ताकि ये अधिकारी बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के काम कर सकें। सत्तर के दशक के बाद जब भ्रष्टाचार बढ़ा, तो राज्य सरकारों ने तबादले, निलंबन आदि का भय दिखाकर इन अधिकारियों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया।