फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   after regionation

इस्तीफे से आगे

Thu, 27 Feb 2014 07:09 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 27 Feb 2014 07:09 PM IST
विज्ञापन
after regionation

सिंधुरत्न पनडुब्बी हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी ने जिस तत्परता से अपना इस्तीफा सौंपा, वह सत्ता राजनीति में दायित्वपूर्ण पदों पर आसीन लोगों के लिए एक सबक होना चाहिए। हालांकि इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि हाल के दौर में मुंबई स्थित पश्चिमी कमान में एक के बाद एक हादसा होने के बावजूद नौसेना ने सतर्कता बरतने का कोई सुबूत नहीं दिया। फिर विगत अगस्त में सिंधुरक्षक में हुए विस्फोट के बाद से नौसेना प्रमुख रक्षा मंत्रालय के निशाने पर भी थे।

विज्ञापन


लेकिन शायद ही कोई मानेगा कि नौसेना प्रमुख के इस्तीफे भर से हादसे रुक जाएंगे। बल्कि बीते करीब एक साल के पनडुब्बी हादसों का पैटर्न देखने से पता चलता है कि गलती अकेले नौसेना की नहीं है। यह सर्वज्ञात तथ्य है कि पश्चिमी कमान में न सिर्फ ट्रैफिक बहुत अधिक है, बल्कि लंबे समय से तलहटी भी साफ नहीं की गई। इस कारण पनडुब्बी की पेंदी के तलहटी छू लेने के चौंकाने वाले उदाहरण भी सामने आए हैं! नौसेना का तर्क है कि तलहटी साफ करने की परियोजना में हुई देरी के लिए नौकरशाही जिम्मेदार है।
विज्ञापन


सेना का जिस तरह का तंत्र है, उसमें खरीद-फरोख्त में अनियमितता और परियोजनाओं पर अमल होने में विलंब कोई छिपी हुई बात नहीं है। जर्जर हो चुकी पनडुब्बियों और उनके मरम्मत के लिए हो रहे भारी खर्च पर सवाल उठते ही रहे हैं; कैग इस पर आपत्ति जता ही चुका है। पनडुब्बियों की किल्लत से जूझते मुल्क को नई खरीद से लेकर मरम्मत तक सिर्फ रूस पर ही निर्भर क्यों होना चाहिए? फिर विवाद में केवल नौसेना ही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रक्षा मंत्री ए के एंटनी का आठ वर्ष का कार्यकाल सेना में अप्रिय विवादों और घोटालों के कारण भी जाना जाएगा, चाहे वह जनरल वी के सिंह का मामला हो, सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली कूच करने की बात हो या अगस्ता-वेस्टलैंड खरीद सौदे में हुआ घोटाला हो। नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की हत्या पर संसद में दिया गया रक्षा मंत्री का बयान भी आश्वस्तकारी नहीं था। ऐसे में, एडमिरल जोशी का इस्तीफा स्वीकार कर लेने वाले रक्षा मंत्री से यह पूछना ही चाहिए कि नौसेना में बेहतर बेदलाव के लिए उनके पास क्या कोई रोडमैप है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed