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बजट सत्र का हासिल

Wed, 13 May 2015 08:37 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 13 May 2015 08:37 PM IST
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Achievement of Budget session

द्र सरकार की छवि और आर्थिक सुधारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देखते हुए बजट सत्र को जितना महत्वपूर्ण माना जा रहा था, सरकार के लिए यह उतना महत्वपूर्ण साबित नहीं हो पाया। भारत-बांग्लादेश भू-सीमा समझौता विधेयक और काले धन पर अंकुश लगाने के लिए लाए गए विधेयक पर संसद के दोनों सदनों से मिली मंजूरी-बजट सत्र के दूसरे हिस्से में ले-देकर यही बड़ी उपलब्धियां सरकार के हिस्से में आई हैं।

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काले धन पर उसकी सफलता इसलिए बड़ी है कि इससे न सिर्फ इस मुद्दे पर उसकी गंभीरता का पता चलता है, बल्कि राज्यसभा में कांग्रेस के विरोध के बावजूद वह इसे पारित कराने में सफल रही है। जबकि बजट सत्र के पहले हिस्से में उसने बीमा और कोल माइन्स जैसे विधेयक पारित कराए थे। संशोधित भूमि अधिग्रहण विधेयक और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पर अंत-अंत तक सहमति नहीं बन पाई। इनमें से जीएसटी को प्रवर समिति के पास भेजा गया है, तो संशोधित भूमि अधिग्रहण विधेयक को संयुक्त समिति के हवाले किया गया।
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चूंकि इन दो विधेयकों के कानून बनने पर अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद सर्वाधिक है, ऐसे में इन्हें कानून का रूप दे पाने में सत्ता पक्ष की विफलता के बाद शेयर बाजार को लुढ़कते हुए देखना अस्वाभाविक नहीं है। दरअसल राज्यसभा में पर्याप्त संख्याबल न होने के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों के अटकने की आशंका पहले से थी। तिस पर खुद सत्तापक्ष द्वारा टकराव का रास्ता अपनाने के कारण भी मामला बिगड़ा।
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सबसे बड़ी बात यह कि बजट सत्र के इसी दूसरे भाग में राहुल गांधी को पहली बार पूरी आक्रामकता के साथ सरकार पर हमला करते देखा गया। उनके इस तेवर ने खासकर कांग्रेस और आम तौर पर पूरे विपक्ष में नई जान फूंकी है। नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल पूरे होने वाले हैं, पर अर्थव्यवस्था को अभी तक अपेक्षित गति नहीं दी जा सकी है। चूंकि निकट भविष्य में राज्यसभा में संख्याबल के मामले में सरकार को कोई राहत मिलने वाली नहीं है, ऐसे में उसे अपने वायदों को जमीनी हकीकत बनाने के लिए नई रणनीति बनानी होगी। जैसे, अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस से, जो अब तक संसद में उसके खिलाफ ही रही हैं, नया संबंध बनाकर वह आगामी मानसून सत्र में अपनी राहें कुछ आसान कर सकती है।

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