हादसा या साजिश
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जिस दौर में धरती से आकाश तक कुछ भी खोजी उपग्रहों की नजरों से परे नहीं है, उस समय एक मलयेशियाई बोइंग विमान का पिछले पांच दिनों से गायब रहना चिंता के साथ-साथ गहन आश्चर्य का भी विषय है। कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के कुछ ही घंटे बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका संपर्क जिस तरह खत्म हो गया, वह हमारी वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी दक्षता के लिए चुनौती इसलिए भी है, क्योंकि एक से एक आधुनिकतम उपकरणों से लैस बोइंग 777 को दुनिया के सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय विमानों में से माना जाता है। प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति में भी उसका कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं टूटता।
इसके बावजूद वह न सिर्फ गायब हुआ है, बल्कि पिछले कई दिनों से उन्नत टोही विमानों के बेड़े और विभिन्न देशों के खोजी दल मिलकर भी उसकी शिनाख्त नहीं कर पाए हैं। उस विमान से जुड़ी तमाम अटकलें कुछ दूर जाकर जिस तरह खारिज हो जा रही हैं, वे तो और भी अधिक हताशानजक हैं। उदाहरण के लिए, इस पर फिलहाल कितना यकीन करें कि फर्जी पासपोर्ट से सफर करते दो ईरानी नागरिकों की मौजूदगी के बावजूद उस विमान की गुमशुदगी के पीछे आतंकी वजह नहीं रही होगी? या तकनीकी विशेषज्ञों की इस टिप्पणी पर ही क्या कहें कि विमान में सवार कुछ लोगों के मोबाइल पर रिंगटोन बजना किसी संभावना का सूचक नहीं है?
चीन के हाई रेजोल्यूशन उपग्रहों ने कई जगह रिसते हुए तेल को उस विमान की आपदा से जोड़ने की कोशिश की है, लेकिन इसे साबित करने का कोई तथ्य अभी सामने नहीं है। अगर उस विमान के साथ कोई हादसा हुआ होता,तो जमीन से लेकर समुद्र की सतह पर कहीं न कहीं उसके निशान होते, जो नहीं हैं।
इन सबके बीच 239 लोगों की सलामती का सवाल पिछले कई दिनों से उनके परिजनों को परेशान कर रहा है, तो इसे समझा जा सकता है। भारत के लिए यह मामला सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि उस विमान में सवार कुछ लोग भारतीय थे, बल्कि उसकी खोज को जिस तरह अंडमान सागर तक बढ़ा दिया गया है, उस कारण अब भारत भी इस खोज अभियान का हिस्सा बन गया है।
जितनी जल्दी इस विमान का सुराग मिले, वह मानवता के लिए भी अच्छा होगा और खुद विज्ञान के लिए भी।