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दिल्ली आप के हवाले

Mon, 23 Dec 2013 07:38 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 23 Dec 2013 07:38 PM IST
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AAP in delhi

राजनीति के प्रचलित तौर-तरीकों को तोड़ने वाली आम आदमी पार्टी अब जबकि दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला ले चुकी है, तब भी उसकी भाव-भंगिमाएं आंदोलनकारियों जैसी ही हैं। कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियां, जो कल तक अरविंद केजरीवाल को नौसिखुआ मान रही थीं, उन्हें भी अभी समझ नहीं आ रहा है कि आखिर यह आम आदमी-सा दिखने वाला शख्स आगे करेगा क्या?

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उन्होंने अब तक जिस तरह की राजनीति का प्रदर्शन किया है; रायशुमारी में आम जनता ने उसी पर विश्वास जताया है। यह तो खुद वह भी जानते हैं कि उन्हें सरकार बनाने का मौका सिर्फ इसलिए मिला, क्योंकि पहले नंबर पर आई भाजपा ने हाथ खींच लिए थे और कांग्रेस ने मजबूरी में उनकी ओर समर्थन का हाथ बढ़ाया है। केजरीवाल चाहते, तो यह कहकर बच सकते थे कि उनके पास बहुमत नहीं है, इसलिए वह सरकार नहीं बनाएंगे, पर उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की; इसलिए उन्हें काम करने का मौका दिया जाना चाहिए।
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मगर यह जिम्मेदारी संभालते हुए उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा कि लोगों ने सिर्फ इसलिए नहीं चुना है कि वह भाजपा और कांग्रेस की राजनीति को खारिज करते रहें और उनकी करतूतों को गिनाते रहें! उन्हें उन वायदों पर भी खरा उतरना होगा, जो उन्होंने दिल्ली की जनता से किए हैं। केजरीवाल ने वीआईपी संस्कृति को खत्म करने का वायदा किया है और ऐलान किया है कि उनके सभी मंत्री सहित वह भी लालबत्ती और हूटर का इस्तेमाल नहीं करेंगे। यह अच्छी पहल है, मगर ये सिर्फ प्रतीकात्मक कदम हैं।
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इसके बावजूद उन्हें सुरक्षा लेने से इन्कार नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह व्यवस्था से जुड़ा मसला है। कई कदम ऐसे हैं, जिनके लिए उन्हें दिल्ली की तीनों नगर निगमों से सहयोग की जरूरत होगी, जहां अभी भाजपा का दबदबा है। इसी तरह कुछ फैसले ऐसे हैं, जिनके लिए उन्हें केंद्र के सहयोग की जरूरत होगी। लेकिन बिजली की दरें आधी करने, सात सौ लीटर पानी मुफ्त देने और अनियमित कालोनियों को नियमित करने के अपने वायदों पर अमल कर वह देश की राजनीति में नई नजीर पेश कर सकते हैं। वाकई आप ने व्यवस्था में फैली गंदगी पर झाड़ू चलाने की जो जिम्मेदारी उठाई है, उसे सारा देश प्रयोग की तरह देख रहा है!

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