सत्तर से अस्सी के दशक की फिल्में

अनुराधा गोयल Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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सत्तर से अस्सी के दशक के दौर में दिलचस्प रूप से अमिताभ की हिट होने वाली अनेक फिल्में ऐसी थी जिसका मुख्य किरदार किसी न किसी असाध्य बीमारी से पीडि़त था। 'रेशमा और शेरा' (1971) में अमिताभ गूंगे-बहरे बने थे। इसी दौर में तमाम फिल्मों में बीमारियों को ही फोकस किया गया। 1971 में फिल्म 'आनंद' के राजेश खन्ना पेट के कैंसर से जूझते हैं। 1972 में आई सुपरहिट फिल्म 'कोशिश' के नायक संजीव कुमार और नायिका जया भादुरी दोनों ही गूंगे-बहरे थे।
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साई परांजपे की नेत्रहीनों पर बनी फिल्म 'स्पर्श' भी इसी श्रेणी की फिल्म है। 1973 में बनी 'धुंध' फिल्म में डैनी ने एक ऐसे लकवाग्रस्त व्यक्ति का किरदार निभाया था जिसके शरीर का निचला हिस्सा बेकार हो चुका है। यह फिल्म भी सुपरहिट फिल्मों की श्रेणी में आती है। संजीव कुमार 'खिलौना' में विक्षिप्त बने थे और राजेश खन्ना ने खामोशी में कैंसर पीड़ित का रोल अदा किया। जिन्हें दर्शकों ने भी काफी पसंद किया।

सवाल - क्या फिल्मों में बीमारियों को गंभीरता से चित्रित किया जाता है ?
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