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आजम - अमर सिंह, चहेती पर खिंची तलवारें
विनीता वशिष्ठ
Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
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जो कभी यार हुआ करते थे, अब एक दूसरे को पानी पी-पी कर कोसते हैं। राजनीतिक दुश्मनी से निजी दुश्मनी पर उतरे अमर सिंह और आजम खान के बीच कलह का केंद्र बनी जयाप्रदा। जया को लेकर अमर और आजम के बीच ऐसी तल्खियां पैदा हुई कि मुलायम सिंह तक को पसीना आ गया। इस दुश्मनी का अंजाम अमर सिंह की सपा से विदाई के रूप में देखने को मिला। दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ गंदे आरोपों और गालियों पर उतर आए। अमर ने आजम को 'बेशर्म' तो आजम ने अमर को 'दलाल' तक कह डाला।
दोनों ही नेता कभी एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। कहते हैं कि मुलायम सिंह को सत्ता सुख इन दोनों नेताओं की दोस्ती और कड़ी मेहनत से मिला। दुश्मनी तब पैदा हुई जब जयाप्रदा को रामपुर (आजम खान की पारंपरिक सीट) से चुनाव लड़ाने की बात हुई। आजम खान ने इसका विरोध किया और जयाप्रदा के खिलाफ काफी बयानबाजी की। अमर ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया और कह डाला कि आजम ने जया को परेशान करना नहीं छोड़ा तो वो पार्टी छोड़ देंगे।
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दोनों ही नेता कभी एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। कहते हैं कि मुलायम सिंह को सत्ता सुख इन दोनों नेताओं की दोस्ती और कड़ी मेहनत से मिला। दुश्मनी तब पैदा हुई जब जयाप्रदा को रामपुर (आजम खान की पारंपरिक सीट) से चुनाव लड़ाने की बात हुई। आजम खान ने इसका विरोध किया और जयाप्रदा के खिलाफ काफी बयानबाजी की। अमर ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया और कह डाला कि आजम ने जया को परेशान करना नहीं छोड़ा तो वो पार्टी छोड़ देंगे।
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