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क्या है बहस का मुद्दा

Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
अनुराधा गोयल
अनुराधा गोयल Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
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reasons and topics debate
बेशक, हमारी वैल्यूज बदल रही हैं, लेकिन हमारे संस्कार आज भी पुराने है। हम उन्हीं संस्कारों के सहारे जीना चाहते हैं। आज भी आम आदमी कंडोम खरीदते समय ये देखता है कि कंडोम खरीदते हुए उसे कोई देख तो नहीं रहा या फिर वह ऐसी दुकान से कंडोम खरीदना पसंद करता है जहां भीड़ ना के बराबर होती है। ऐसे में कैसे हम अपने घर में और घरवालों के साथ कंडोम का विज्ञापन देखेंगे।
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ये बहस अब भी जारी है कि सरकार यदि बिग बॉस में दिखाई जा रही अश्लीलता और गाली गलौज को बैन करने के लिए उस रियैलिटी शो का समय बदल सकती है तो फिर अश्लील कंडोम के विज्ञापनों पर रोक क्यों नहीं लगाती?
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सवाल-अश्लील कंडोम और कंट्रासेप्शन के विज्ञापनों पर सरकार अंकुश क्यों नहीं लगा रही?
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