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मानसून का एकमात्र विकल्प

विनीता वशिष्ठ Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
cloud seeding an option for monsoon
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क्लाउड सीडिंग यानी नकली बारिश मानसून का एकमात्र विकल्प है। करीब पचास साल से 57 देश क्लाउड सीडिंग का प्रयोग कर कृत्रिम बारिश करा रहे हैं। चीन में 90 प्रतिशत इलाकों में कृत्रिम बारिश का सहारा लिया जा रहा है। भारत में भी ऐसी तकनीक काम में लाई जा रही है। पिछले नौ साल से आंध्र सरकार भी खेती को बचाए रखने के लिए कृत्रिम बारिश की तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
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कैसे होती है कृत्रिम बारिश


कृत्रिम बारिश कराने का फार्मूला कुछ जटिल भले ही हो लेकिन मौसम विशेषज्ञों की नजर में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले हाइड्रोजन और कार्बन के मिश्रण से पानी बनाया जाता है। फिर कुछ कैमिकल्स का प्रयोग करके टारगेट क्षेत्र के ऊपर वायु के द्रव्यमान को ऊपर की तरफ भेजा जाता है जिससे वे बादल के रूप में ढल सकें। ये यौगिक हवा से नमी सोख लेते हैं और संघनन शुरू करते हैं। इसके बाद बादलों के द्रव्यमान को नमक, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सूखी बर्फ़ और कैल्शियम अंत में ठंडा करने वाले कैमिकल्स से बादलों में सिल्वर आयोडाइड और सूखी बर्फ जैसे ठंठा करने वाले रसायनों क़ो विमान की मदद से बादलों में सीडिंग कराई जाती है। सीडिंग कराने के एक से तीन घंटों के भीतर बारिश होने लगती है। कुछ समय पहले मुंबई नगर निगम को भी अपने सूखे इलाकों में क्लाउड सीडिंग करानी पड़ी।

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