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पानी रे पानी कितना पानी
Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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एक ओर जहां पानी की किल्लत के कारण लोगों का जीना दूभर हो रहा है वहीं पानी का सही प्रबंधन नहीं होने के कारण हर साल देश में बाढ़ के कारण सैकड़ों जानें जाती हैं। बिहार की कोसी नदी अपने भयावह रूप के कारण बिहार का शोक कहलाती है। बरसात का मौसम आते ही पूर्वांचल क्षेत्र, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सहरसा के लोगों का दिल दहलने लगता है क्योंकि नदियां उफान पर होती हैं और गांव के गांव नदी की धारा में बह जाते हैं।
यही हाल असम का भी है। यहां ब्रह्मपुत्र नदी में आए बाढ़ के कारण भारी जान-माल का नुकसान होता है। बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद जब तक लोग सदमे से उबरने की कोशिश करते हैं तब तक नदी फिर उफनने लगती है और नदी मौत का तांडव मचाने लगती है। बाढ़ के कारण इन क्षेत्रों के बहुत से कृषक महानगरों में जाकर मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं।
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यही हाल असम का भी है। यहां ब्रह्मपुत्र नदी में आए बाढ़ के कारण भारी जान-माल का नुकसान होता है। बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद जब तक लोग सदमे से उबरने की कोशिश करते हैं तब तक नदी फिर उफनने लगती है और नदी मौत का तांडव मचाने लगती है। बाढ़ के कारण इन क्षेत्रों के बहुत से कृषक महानगरों में जाकर मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं।
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