फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   pain and neglectation of dividation of india pak

बंटवारे का दर्द और उपेक्षा

Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
विनीता वशिष्ठ
विनीता वशिष्ठ Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
pain and neglectation of dividation of india pak
पाकिस्तान के हिंदू भारत लौटने को बेताब हैं। वो गुजारिश कर रहे हैं कि उन्हें भारत में शरण मिले। आखिर क्यों पाकिस्तान में बसे हिंदू भारत लौटना चाह रहे हैं। इतने सालों बाद आखिर ऐसा क्या हुआ है जो पाकिस्तान में बसे हिंदू भारत आना चाहते हैं, किसी भी शर्त पर। बंटवारे के समय पाकिस्तान में ही रुक गए लाखों हिंदुओं ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ये दिन देखने पड़ेंगे। जो हिंदू ये सोचकर पाकिस्तान में बसे रह गए कि अवाम सिर आंखों पर बैठाएगी, वही अवाम हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों पर आंखें मूंदे हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स चीख चीख कर कह रही है कि पाकिस्तान में हिंदू खुशहाल नहीं। दहशत, लूटपाट, जबरन वसूली, मारपीट, अपहरण, धर्म परिवर्तन से पाकिस्तान का हिंदू इस कदर टूट चुका है कि हर महीने यहां से हिंदू परिवार पलायन कर रहे हैं। जो बचे हैं वो भारत में पनाह लेने की गुजारिश कर रहे हैं।
विज्ञापन


पिछले कुछ सालों में जबरन वसूली और हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन के मामले बढ़े हैं। सवाल उठता है कि आखिर क्यों पाकिस्तान की सरकार अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अत्याचार पर चुप है। कहीं इसकी वजह भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी तो नहीं। क्या पाकिस्तान बंटवारे का बदला अभी तक और इस तरह ले रहा है।
विज्ञापन


सवाल - क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की बदहाली के लिए सरकार जिम्मेदार है। क्या सभी हिंदुओं को भारत में जगह मिलनी चाहिए?
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed