{"_id":"1139","slug":"Samachar-1139","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्तों का चढ़ावा बाजार में","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
भक्तों का चढ़ावा बाजार में
इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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आसाराम के पूर्व पीए महेंद्र चावला ने दावा किया है कि बापू के आश्रम में कई गलत काम होते हैं। काला जादू का आरोप तो महेंद्र चावला लगा ही चुके हैं। इसके अलावा उन्होने आरोप लगाया है कि आसाराम को दक्षिणा में शाल, कबंल, लोई, सूखा मेवा और कपड़े आदि मिलते हैं लेकिन आसाराम उन्हें अपने आश्रम के लोगों को देने की बजाय बाजार में बेच डालते हैं।
दीपावली के मौके पर आश्रम में लगने वाली दुकानों में भक्तों का ये चढ़ावा लाखों रुपए में बेचा जाता है। श्रद्धा में चढ़ने वाले नारियल की मिठाई बनाकर बेची जाती है। दूसरी तरफ आश्रम में रहने वाले बच्चों को एक मिठाई का दाना तक नहीं मिलता। चढ़ावे में मिलने वाले कंबल और स्वेटर भी बेच दिए जाते हैं जबकि आश्रम में रहने वाले बच्चे सर्दी में बिना स्वेटर और जूतों के ठिठुरते रहते हैं।
बच्चों से मजदूरी कराई जाती है और पैसा आसाराम के खाते में जाता है। कई भक्त आसाराम के खिलाफ बोल चुके हैं लेकिन आसाराम के आश्रम में चढ़ने वाले चढ़ावे में कोई कमी नहीं आई है।
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बापू का जवाब
इस विषय पर हालांकि बापू का जवाब नहीं मिल पाया लेकिन उनके आश्रम के लोगों का कहना है कि इस तरह के आरोप सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए लगाए जाते हैं। ये किसी ऐसे भक्त का आरोप है जिसे गलत काम करने पर आश्रम से निकाल दिया गया होगा।
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दीपावली के मौके पर आश्रम में लगने वाली दुकानों में भक्तों का ये चढ़ावा लाखों रुपए में बेचा जाता है। श्रद्धा में चढ़ने वाले नारियल की मिठाई बनाकर बेची जाती है। दूसरी तरफ आश्रम में रहने वाले बच्चों को एक मिठाई का दाना तक नहीं मिलता। चढ़ावे में मिलने वाले कंबल और स्वेटर भी बेच दिए जाते हैं जबकि आश्रम में रहने वाले बच्चे सर्दी में बिना स्वेटर और जूतों के ठिठुरते रहते हैं।
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बच्चों से मजदूरी कराई जाती है और पैसा आसाराम के खाते में जाता है। कई भक्त आसाराम के खिलाफ बोल चुके हैं लेकिन आसाराम के आश्रम में चढ़ने वाले चढ़ावे में कोई कमी नहीं आई है।
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बापू का जवाब
इस विषय पर हालांकि बापू का जवाब नहीं मिल पाया लेकिन उनके आश्रम के लोगों का कहना है कि इस तरह के आरोप सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए लगाए जाते हैं। ये किसी ऐसे भक्त का आरोप है जिसे गलत काम करने पर आश्रम से निकाल दिया गया होगा।