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हर किसी को होगा फायदा
विनीता वशिष्ठ
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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जमीन को फायदा
ऑरगेनिक खेती का सबसे बड़ा फायदा किसान को है। कम लागत और घरेलू स्तर के परिश्रम में शुद्ध अनाज की प्राप्ति। सबसे बड़ी बात उस जमीन की उर्वरकता भी बरकरार रहती है जिसे जिंदगी भर अन्न उपजाना है।
जेब को फायदा
कम लागत में ऑरगेनिक खेती से पैदा हुए ऑरगेनिक फूड बाजार में मुंह मांगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। ऑरगेनिक फूड रासायनिक प्रक्रिया से पैदा हुए अनाज से कहीं महंगा है। क्योंकि यह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक है और इसीलिए ग्राहक इसे हाथों हाथ लेता है। ऑगरेनिक अनाज और सब्जियां को मंडी में आम उत्पाद के विक्रेता से कंपटीशन भी नहीं रहता।
बिचौलियों का झंझट नहीं
ऑरगेनिक खेती करने वाले किसान कई कंपनियों द्वारा सर्टिफाइड होते हैं और यही वजह है कि उन्हें अपना माल लेकर मंडी तक नहीं जाना पड़ता। कंपनियां खुद जाकर खेत से ही किसान का माल ले लेती हैं और चेन मैनेजमेंट के जरिए माल ग्राहक तक पहुंच जाता है। कई कंपनियां अपने आउटलेट्स में ऑरगेनिक उत्पादों की बिक्री करती हैं। इन आउटलेट्स के ज़रिए एक तरफ किसानों को बाज़ार मिलता है और दूसरी तरफ वो बिचौलियों की तानाशाही से बचा भी रह सकता है।
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क्या आपको लगता है कि कम अन्न उपजाने के बावजूद ऑरगेनिक खेती किसान और जमीन के हित में है। क्या ऑरगेनिक खेती को बढ़ावा देने से किसान का भला होगा?
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ऑरगेनिक खेती का सबसे बड़ा फायदा किसान को है। कम लागत और घरेलू स्तर के परिश्रम में शुद्ध अनाज की प्राप्ति। सबसे बड़ी बात उस जमीन की उर्वरकता भी बरकरार रहती है जिसे जिंदगी भर अन्न उपजाना है।
जेब को फायदा
कम लागत में ऑरगेनिक खेती से पैदा हुए ऑरगेनिक फूड बाजार में मुंह मांगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। ऑरगेनिक फूड रासायनिक प्रक्रिया से पैदा हुए अनाज से कहीं महंगा है। क्योंकि यह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक है और इसीलिए ग्राहक इसे हाथों हाथ लेता है। ऑगरेनिक अनाज और सब्जियां को मंडी में आम उत्पाद के विक्रेता से कंपटीशन भी नहीं रहता।
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बिचौलियों का झंझट नहीं
ऑरगेनिक खेती करने वाले किसान कई कंपनियों द्वारा सर्टिफाइड होते हैं और यही वजह है कि उन्हें अपना माल लेकर मंडी तक नहीं जाना पड़ता। कंपनियां खुद जाकर खेत से ही किसान का माल ले लेती हैं और चेन मैनेजमेंट के जरिए माल ग्राहक तक पहुंच जाता है। कई कंपनियां अपने आउटलेट्स में ऑरगेनिक उत्पादों की बिक्री करती हैं। इन आउटलेट्स के ज़रिए एक तरफ किसानों को बाज़ार मिलता है और दूसरी तरफ वो बिचौलियों की तानाशाही से बचा भी रह सकता है।
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