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14 साल की कैद मिली बहन से मिलने पाक जाने की सजा

Mon, 29 Sep 2014 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक Updated Mon, 29 Sep 2014 02:18 AM IST
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एक बेगुनाह अपने ही देश में पुलिस की यातना का ऐसा शिकार हुआ कि उसे 14 वर्षों तक जेल में रहना पड़ा।
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पुलिस ने उसके खिलाफ 22 मामले दर्ज किए। मामला जब कोर्ट में पहुंचा तो एक के बाद एक 22 में से 20 मामलों में बरी हो गए। उन्हें इस बात की सजा मिली थी कि वह अपनी बहन से मिलने पाकिस्तान चला गया था।

यह बताया मोहम्मद आमिर खान ने। उन्हें 20 फरवरी 1998 को दिल्ली पुलिस ने 18 साल की उम्र में गिरफ्तार कर लिया था। 14 साल तक जेल में रहने के बाद बेगुनाह साबित होकर रिहा हो गए। वह रविवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह जयंती पर नितानंद स्कूल में सामाजिक संस्था सप्तरंग की ओर से मानवाधिकार विषय पर कराए जा रहे कार्यक्रम में पहुंचे थे।
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थर्ड डिग्री दी, सादे कागज पर कराया था साइन
मोहम्मद आमिर खान ने बताया कि पैदल जा रहा था। तभी सिविल ड्रेस में आए लोग जीप में डालकर ले गए। बाद में पता चला कि वह दिल्ली पुलिस थी। सात दिन तक थर्ड डिग्री देने के बाद उससे सादे कागज पर साइन कराकर अदालत में पेश किया। 1997-98 में दिल्ली, रोहतक और गाजियाबाद में बम धमाके करने का आरोप लगा। कोर्ट में मुंह बंद रखने की धमकी मिली। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में बताया कि मैंने पाकिस्तान जाकर बम बनाने का प्रशिक्षण लिया और यहां आकर धमाके किए। खान ने बताया कि जिन बम धमाकों के आरोप उन पर लगे थे, वह उसके पाकिस्तान जाने से दो माह पहले ही हो चुके थे।
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दो मामले उच्च न्यायालय में लंबित  
मानव अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज से संबद्ध वरिष्ठ वकील एन.डी. पंचोली ने उनके केसों में मदद की। रोहतक से राजेश शर्मा ने न्याय मित्र के रूप में पैरवी की। जीवन के 14 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजार कर 10 जनवरी 2012 में रिहा हुए। हालांकि दो मामले अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है।

मां के मुंह से बेटा सुनने को तरसता हूं  
आमिर ने बताया कि उनके जेल जाने के बाद पिता का व्यापार ठप हो गया। वे कर्ज में डूबते गए और दो साल बाद ही सदमे में दम तोड़ दिया। मां को लकवा मार गया। वे अब बोल नहीं सकतीं। मेरे कान मां के मुंह से ‘बेटा’ शब्द सुनने को तरसते हैं। पड़ोसी, रिश्तेदार सब बेगाने हो गए। 16 साल पहले मिली यातनाएं याद कर रात में कई बार चीख कर उठ बैठते हैं।

सकारात्मक सोच से मिली जीत
आमिर ने बताया कि उन्होंने अपनी सोच हमेशा सकारात्मक रखी। देश के संविधान में विश्वास था। वे मानते हैं कि पूरा पुलिस विभाग बुरा नहीं है। कई पुलिस अधिकारी गलत हैं, जो अपने पद का दुरुपयोग करते हैं।

किताबें और पेड़ पौधों को बनाया दोस्त
आमिर ने बताया कि उसने जेल में किताबों और पेड़-पौधों को दोस्त बना लिया था। 11वीं के बाद तिहाड़ जेल में रहते हुए इग्नू से पढ़ाई जारी रखी। गाजियाबाद जेल में रहते हुए गांधी जी पर निबंध प्रतियोगिता में भाग लिया। इसमें प्रदेश भर के 400 प्रतिभागियों में वे प्रथम रहा। रोहतक जेल में गुजारे 6 माह के बारे में बताया कि किस प्रकार यहां साथी कैदी नरमी से पेश आते थे। जेल में कुरान, गीता और रामायण का अध्ययन करने वाले आमिर ने बताया कि उनके लिए मानवता सबसे बड़ा धर्म है और महात्मा गांधी उनके आदर्श हैं।


सप्तरंग कार्यक्रम में दिल्ली के वकील एवं पीयूसीएल (दिल्ली) के अध्यक्ष एनडी पंचोली और रोहतक के वकील राजेश शर्मा और सप्तरंग के प्रधान प्रिंसिपल (सेवानिवृत्त) महावीर शर्मा मौजूद रहे। पंचोली ने सवाल उठाया कि क्या हमारी पुलिस का व्यवहार संविधान के मुताबिक होता है। 1981 से सिफारिश किए गए पुलिस सुधार क्यों नहीं लागू किए जा रहे। राजेश शर्मा ने बताया कि आमिर पर 2 केस रोहतक के थे, जिनमें उन्होंने सहायता की। आमिर के खिलाफ सबूत नहीं मिलने से वे बेकसूर साबित हुए।
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