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स्मार्टफोन बनेगा डिप्रेशन दूर भगाने का जरिया

Sat, 27 Jul 2013 03:28 PM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sat, 27 Jul 2013 03:28 PM IST
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Now smartphones can relieve your stress

अभी तक ये माना जाता था कि मोबाइल से शारीरिक और मानसिक तौर पर कई नुकसान होते हैं। लेकिन अब एक्सपट्र्स ने दावा किया है कि मोबाइल से डिप्रेशन दूर किया जा सकता है

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हाल ही में चंडीगढ़ में पीजीआई के एक्सपर्ट ने कहा कि वे डिप्रेशन का इलाज अब मोबाइल के जरिए करेंगे। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च ने इस नए प्रोजेक्ट का पहला फेज पूरा कर लिया है। अगले चरण में मोबाइल ऐप्लीकेशन की तैयारी की जा रही है
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इस प्रोजेक्ट का नाम है ‘डवलपमेंट एंड इंप्लीमेंटेशन ऑफ मॉडल टेलीसाइकेट्री ऐप्लीकेशन एंड डिलीवरिंग मेंटल हेल्थकेयर इन रिमोट एरिया’। यह मेडिकल पर आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम है।
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पीजीआई के साइकेट्रिक विभाग की प्रमुख और प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर प्रोफेसर सविता मल्होत्रा ने पीजीआई में हुई प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि रिमोट एरिया में साइकेट्रिक पेशेंट के लिए डॉक्टर नियुक्त करना किसी भी तरह से संभव नहीं है।

रिमोट एरिया के हेल्थ वर्करों को ट्रेंड करना या वहां डॉक्टर को ट्रेंड करना बहुत लंबा प्रोसीजर था। इसलिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विस की मदद से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे रिमोट एरिया के डॉक्टरों को दे दिया जाएगा।

ऐसे काम करेगा ये सॉफ्टवेयर
इस सॉफ्टवेयर में पीडीएफ फॉर्मेट है, जिसमें एक समान्य साइकेट्रिक के लिए प्रश्न दिए गए हैं। यह सारा कुछ हां और ना के फॉर्मेट में है। डॉक्टर मरीज से सवाल पूछेंगे और उसका उत्तर वह हां या न के रूप में नोट करते जाएंगे।

इसके साथ ही मरीज का वीडियो भी तैयार होगा, जिसको पीजीआई के एक्सपर्ट के पास ऑनलाइन सिस्टम से भेज दिया जाएगा। यहां वीडियो और उत्तरों के आधार पर मरीज की एनालिसिस की जाएगी और उसके बाद उनको दवाएं भी बताई जाएंगी।

मल्होत्रा ने बताया कि टीसीएस इसके लिए एक मोबाइल ऐप्लीकेशन भी तैयार करेगा। यह प्रक्रिया अगले फेज में होगी। इसके बाद मरीज घर बैठे कंसल्टेंसी ले सकेंगे।


एक हजार का हो रहा इलाज
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अब तक एक हजार मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्रोफेसर सविता मल्होत्रा ने बताया कि ई-साइकेट्री के जरिए मरीज की पहचान करना आसान है। इससे रिमोट एरिया में आसानी से पहुंचा जा सकता है। पीजीआई में मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। यह ऐप्लीकेशन प्राइमरी और सेकेंडरी वर्जन के बीच का रास्ता है।

सॉफ्टवेयर की खासियत
1-एजूकेशनल टूल
2-रिसर्च टूल
3-कंप्रिहेंसिव
4-इंटेलिजेंट
5-समय बचाने वाला

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