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कोर्ट की फटकार, जी के संपादक नहीं कर सकते मनमानी

Fri, 08 Feb 2013 10:30 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 08 Feb 2013 10:30 PM IST
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zee editors cannot dictate terms for giving voice sample says court

दिल्ली की एक अदालत ने साफ कहा है कि कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल के उद्योग समूह से 100 करोड़ रुपये की वसूली के प्रयास के आरोपों की जांच में घिरे जी न्यूज के दोनों संपादक आवाज के सैंपल देने के मामले में किसी तरह की ‘मनमानी’ नहीं कर सकते।

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कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उनकी कोई शर्त नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलुवालिया की इस याचिका को खारिज कर दिया कि वह जांचकर्ताओं को जिंदल समूह द्वारा किए स्टिंग ऑपरेशन से तैयार एक ऑडियो क्लिप की ‘ट्रांस्क्रिप्ट’ (प्रतिलिपि) को पढ़ कर अपनी आवाज के नमूने लेने से रोके।
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अतिरिक्त चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार ने फटकार लगाते हुए कहा कि अगर जांच एजेंसी चौधरी और अहलुवालिया की आवाज के नमूने चाहती है, तो दोनों को एजेंसी की नीति और पद्धति मानना ही पड़ेगी। न्यायाधीश ने कहा, ‘अब यह दोनों आरोपियों (सुधीर और समीर) पर है कि वे अपनी आवाज के नमूने देना चाहते हैं या नहीं।
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यदि वे नमूने देना चाहते हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन करना पड़ेगा। जांच अधिकारी को साइंटिफिक ऑफिसर बताएंगे कि संपादकों की आवाज के नमूने किस अंदाज में चाहिए। ताकि वे जिंदल समूह द्वारा किए गए स्टिंग से सैंपल का मिलान कर सकें।’

अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि खुद संपादकों ने अपनी गिरफ्तारी के दौरान सहमति व्यक्त की थी कि रिहा होने पर वे जांच में सहयोग करेंगे और अपनी आवाज के नमूने देंगे। ऐसे में अब उन्हें किसी तरह की मनमानी करने की छूट नहीं दी जा सकती। वे यह नहीं कह सकते कि इस तरह से अपनी आवाज के नमूने नहीं देंगे या उस तरह अपनी आवाज के नमूने देंगे। उन्हें जांच एजेंसी का निर्देश मानना ही होगा।

कोर्ट के अनुसार यदि दोनों संपादक इस मामले के जांच एजेंसी के खिलाफ याचिका दायर करते हैं तो माना जाएगा कि वे जांच को पटरी से उतारने और उसकी दिशा भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर वे अपनी आवाज के सैंपल देने में आनाकानी या इनकार करते हैं तो ऐसे किसी भी प्रयास को यह माना जाएगा कि वे मनमानी कर रहे हैं और जांच एजेंसी पर अपनी शर्तें थोपने के प्रयास कर रहे हैं।

सुधीर और समीर ने 12 दिसंबर 2012 को लाई डिटेक्टर टेस्ट देने से मना कर दिया था। मगर वे अपनी आवाज के नमूने देने के लिए राजी हो गए थे। जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार ये संपादक बाद में मुकर गए। जांच अधिकारी जब 21 दिसंबर, 2012 को आवाज के नमूने लेने पहुंचे तो संपादकों ने अपने वकीलों की सलाह पर सैंपल देने से मना कर दिया। वहीं संपादकों के वकील ने अदालत से कहा कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जिस तरह की ट्रांस्क्रिप्ट पढ़वा कर आवाज के नमूने लेना चाह रही थी वे ‘फंसाने वाली लाइनें’ थीं।

सुधीर और समीर पर जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड से विज्ञापनों की डील के रूप में 100 करोड़ रुपये की वसूली के प्रयास करने का आरोप है। दोनों बदले में जिंदल के कोयला घोटाले से जुड़ी खबरें जी न्यूज पर न प्रसारित करने का कथित सौदा कर रहे थे।


दोनों को गिरफ्तार करने के बाद जमानत पर 17 दिसंबर, 2012 को रिहा किया गया था। इनके अतिरिक्त जी ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और उनके बेटे का नाम भी जिंदल समूह द्वारा एफआईआर में दर्ज कराया गया। हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई। दोनों संपादक आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

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