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जी के बॉस लाई डिटेक्टर टेस्ट पर असमंजस में

Wed, 12 Dec 2012 12:53 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 12 Dec 2012 12:53 AM IST
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zee chief subhash chandra confused on lie detector test

जिंदल समूह से सौ करोड़ रुपये की उगाही के प्रयास के मामले में घिरे जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और जेल में बंद दोनों संपादक लाई डिटेक्टर जांच पर असमंजस में हैं। वे अभी यह भी तय नहीं कर पाए हैं कि आवाज के नमूने दें या न दें। देर रात तक वे अपने वकीलों से इन मुद्दों पर सलाह कर रहे थे।

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सूत्रों के मुताबिक चंद्रा से उनके वकीलों ने इस बारे में उनकी राय जानने का प्रयास किया कि वे क्या सोचते हैं। वकीलों ने उन्हें कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। उन्हें इस तथ्य से भी अवगत कराया कि सर्वोच्च अदालत के आदेशानुसार जांच एजेंसी उन्हें इसके लिए बाध्य नहीं कर सकती। जांच पूरी तरह उनकी रजामंदी पर ही निर्भर है।
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इतना ही नहीं उनके वकीलों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि वे लाई डिटेक्टर जांच कराने से इनकार करते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से यह मामला ट्रायल में उनके खिलाफ भी जा सकता है। इसका कारण यह है कि जांच एजेंसी कहेगी कि यदि वे निर्दोष थे तो इस जांच से घबरा क्यों गए।
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सूत्रों ने बताया कि चंद्रा वकीलों को बुधवार सुबह अपनी राय देंगे। बताया जा रहा है कि दोनों संपादक सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया भी वही रुख अपनाएंगे जो उनके बॉस अपनाएंगे। इस मामले में जांच एजेंसी ने सोमवार को ही इन तीनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने के लिए अदालत में आवेदन दिया था।

जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया है और वे कई अहम तथ्यों को छिपा रहे हैं जिस कारण उनका टेस्ट करवाना जरूरी है। आवेदन पर 12 दिसंबर को सुनवाई होनी है।


क्या है व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश है कि जांच एजेंसी किसी को भी लाई डिटेक्टर जांच के लिए मजबूर नहीं कर सकती। किसी व्यक्ति की रजामंदी से ही उस पर यह जांच की जा सकती है।

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