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'युवाओं को सिगरेट से नुकसान की फिक्र नहीं'

Sat, 30 Jan 2016 09:14 AM IST
Updated Sat, 30 Jan 2016 09:14 AM IST
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Youth not caring about warning on cigarette packets

सुप्रीम कोर्ट ने देश के युवाओं में सिगरेट पीने की लत पर अफसोस जताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिगरेट के पैकट पर वैधानिक चेतावनी होने के बावजूद युवा इसका सेवन कर रहे हैं।

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शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर दी जिसमें गुहार की गई थी कि सिगरेट व बीड़ी के पैकेट के 85 फीसदी हिस्से पर वैधानिक चेतावनी दी जाए। न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि देश के युवा सिगरेट को एन्जॉय कर रहे हैं। उन्हें अपने स्वास्थ्य की कोई फिक्र नहीं है।
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कई तो एक के बाद एक लगातार सिगरेट पी जाते हैं। हमने खुद ही नौजवानों को सिगरेट पीते देखा है। पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील से कहा कि युवा मासूम नहीं हैं। उन्हें भलीभांति पता है सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है।
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चेतावनी मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीड़ी इंडस्ट्री एसोसिएशन

Youth not caring about warning on cigarette packets

इस याचिका में कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें बीड़ी के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट में कर्नाटक बीड़ी इंडस्ट्री एसोसिएशन ने याचिका दाखिल कर कहा था कि बीड़ी के पैकेट छोटे होते हैं लिहाजा पैकेट पर वैधानिक चेतावनी का चित्र लगाने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर सिगरेट और बीड़ी के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी का आकार 40 फीसदी से बढ़ाकर 85 फीसदी करने का निर्णय लिया था। हालांकि राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश इस संबंध में कर्नाटक हाईकोर्ट से जुदा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अधिसूचना पर अमल करने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को यह जानकारी दी कि इस मसले पर कर्नाटक और राजस्थान हाईकोर्ट का अलग-अलग निर्णय है। लेकिन अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है।

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