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आजाद हिंद फौज की ऐतिहासिक बातों को जानेंगे देश के युवा

Wed, 14 Oct 2015 04:19 AM IST
Updated Wed, 14 Oct 2015 04:19 AM IST
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youth know about historical facts of the INA

सुभाष चंद्र बोस के रहस्य परिस्थितियों के गायब होने और उनसे जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग के बीच सरकार अब इस महान स्वतंत्रता सेनानी की आजाद हिंद फौज से जुड़ी ऐतिहासिक बातों को पुस्तकों की श्रृंखला के माध्यम से जनता के सामने पेश करने जा रही है।

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सरकार के शीर्ष स्तर की कोशिश है कि इन पुस्तकों के जरिए देश की युवा पीढ़ी को आखिर बताया जाए कि सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की आजादी की लड़ाई में आखिर कितना बड़ा योगदान रहा।
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आजाद हिंद फौज पर पुस्तकों की बड़ी श्रृंखला पेश करने की योजना दरअसल आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी और नेहरू के अलावा दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों को आगे करने की सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस संबंध में नेशनल बुक ट्रस्ट को आगे बढ़ने के निर्देश दिए है। मंत्रालय के उच्च पदस्थ अधिकारियों के मुताबिक सरकार का शीर्ष स्तर मान रहा है कि अभी तक सुभाष चंद्र बोस के रहस्मय परीस्थितियों में गायब होने के अलावा आज का युवा नेताजी के बारे में ज्यादा जानता नहीं है।

सारी बहस उनके रहस्मय परिस्थितियों में अचानक गायब होने तक सीमित हो जाती है। इसलिए अब सरकार ने आजाद हिंद फौज को विषय बनाकर इससे जुड़ी उत्साहवर्धक बातों को पुस्तक का रूप देने की योजना बनाई है।

आजाद हिंद फौज पर पुस्तकों की श्रृंखला पेश करने की तैयारी

youth know about historical facts of the INA

इसलिए अब सरकार ने आजाद हिंद फौज को विषय बनाकर इससे जुड़ी उत्साहवर्धक बातों को पुस्तक का रूप देने की योजना बनाई है। स्वतंत्रता संग्राम में आजाद हिंद फौज का प्रभाव और भूमिका, अंग्रेजों को दबाव में लाने के लिए फौज का ऑपरेशन और बोस के नेतृत्व क्षमता जैसी चीजों को पुस्तकों के जरिए लोगों के सामने पेश किया जाएगा। इसके लिए बोस के परिवार के सदस्यों से भी एनबीटी के अधिकारियों की बात हुई है।

सूत्रों का कहना है कि अगले महीने तक इस संबंध में पुस्तकों की श्रृंखला पेश की जा सकती है। माना जा रहा है कि सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग के दबाव को कुछ हद तक दूर करने के लिए सरकार ने इन पुस्तकों को पेश करने की रणनीति बनाई है।

सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यूपीए सरकार के दस साल के दौरान इस तरह की कोई कोशिश की गई। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े शोध और अध्ययन कुछ शख्सियतों तक ही सीमित रहा। इसलिए नई सरकार ने इस दिशा में काम करना शुरू किया है।

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