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फायदे का है ‘आधार’, आप भी जल्द बनवाइए
विजय जैन/नई दिल्ली
Updated Sun, 21 Oct 2012 10:25 AM IST
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कार्ड एक और फायदे अनेक। यह है आधार कार्ड। इस कार्ड को रेलवे, बीएसएनएल और गैस कंपनियों ने मान्य कर लिया है। मतलब इस कार्ड को पहचान के रूप में इन जगहों पर इस्तेमाल कर सकते हैं। कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में 16 अंकों का विशेष पहचान नंबर (यूआईडी) आपके जीवन का आधार होगा। यह आपकी पहचान बनेगा। वोट डालने से लेकर बैंक में नोट जमा कराने के लिए खाता खुलवाने तक का काम आप इसके जरिये करा सकेंगे। पासपोर्ट बनवा सकेंगे और किसी भी आधिकारिक काम में इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
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इसी 'आधार' को आम आदमी की भलाई के लिए एक बड़ी कोशिश की शुरुआत करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीते दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की उपस्थिति में अपनी सरकार की इसे महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए जयपुर के आदिवासी बहुल गांव टेंबली में उद्घाटन किया।
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ये दस्तावेज हैं जरूरी
-यदि घर के मुखिया के पास फोटो पहचान पत्र, निवास प्रमाण तथा जन्म तिथि का प्रमाण है तो उनके साथ सभी सदस्यों के आधार कार्ड बन सकेंगे।
-फोटो पहचान पत्र के रूप में पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड, किसान फोटो पास बुक, मान्यता प्राप्त स्कूल-कॉलेज के कार्ड, लेटर हेड पर राजपत्रित अधिकारी का फोटो प्रमाण-पत्र मान्य।
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-एड्रेस प्रूफ के रूप में बिजली, नल, टेलीफोन का बिल, बीमा पॉलिसी, राशन कार्ड, संपत्तिकर की रसीद, वाहन पंजीयन प्रमाण-पत्र मान्य है।
किराएदार व बच्चों के लिए
यदि आप किराए के मकान में रहते हैं तो किराए की रसीद, मकान मालिक का लिखित अनुबंध एड्रेस प्रूफ के रूप में उपयोग कर सकते हैं। दो साल से अधिक उम्र (स्कूल न जाने वाले) के बच्चों के लिए माता-पिता के दस्तावेज मान्य होंगे।
पहले विशेष पहचान संख्या प्रोजेक्ट था नाम
यूआईडीए के प्रमुख नंदन नीलेकनी ने कहा कि विशेष पहचान संख्या प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है आधार। नाम बदलने का क्या कारण है? नीलेकनी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को लोग न तो सही तरह से समझ पा रहे हैं और न इसका नाम सही तरीके से ले पा रहे हैं। कोई इसे डीयूआई कहता है तो कोई इसे आईयूडी कह रहा है। सामान्य लोगों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
लोगों के लिए विशेष पहचान पत्र का नाम लंबा भी है। हम चाहते हैं कि नाम ऐसा हो, जिसको कहने में कोई परेशानी न हो। कुछ ऐसा नाम जिसमें राष्ट्रीय अपील हो और देश का आदमी यह जान जाए कि प्रोजेक्ट वास्तव में क्या है और वह इससे किस तरह से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि हमने इसका नाम 'आधार' रखा है। आधार यानी जो उसके जीवन की बुनियाद है।
इस बुनियाद पर वह जीवन से जुड़े कई काम कर सकता है। प्रोजेक्ट के नए 'लोगो' के बारे में नीलेकनी ने कहा कि सूर्य तेज का प्रतीक है। विशेष पहचान नंबर देते समय में हम व्यक्ति की अंगुलियों के निशान लेंगे। अंगुलियों के निशान ही यह साबित करेंगे कि वह पहचान नंबर अमुक व्यक्ति का है। यही कारण है कि हमने सूर्य के मध्य अंगुलियों के निशान वाला लोगो इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है।
प्रोजेक्ट के कई उद्देश्य है। उनमें से एक अहम उद्देश्य है कि गरीब और वंचित लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना। विशेष पहचान नंबर मिलने के बाद गरीब आदमी का हक कोई नहीं मार पाएगा। जो योजनाएं गरीब आदमी के लिए बनाई गई हैं, उसका लाभ उसको निश्चित रूप से मिलेगा। कोई यह सोचे कि किसी का पहचान नंबर का इस्तेमाल करके उसका हक हड़प लिया जाए, ऐसा नहीं होगा। अंगुलियों के निशान सच्चाई खोल देंगे।