वाजपेयी पहनते हैं चप्पल, आडवाणी रखते हैं मूंछें
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के घर जाकर दिल्ली पुलिस की पूछताछ पर उठे बवाल के बाद वीवीआईपी की सुरक्षा प्रोफाइलिंग संबंधी प्रोफॉर्मा भी चर्चा में आ गया है। इस प्रोफॉर्मा में वीवीआईपी के पहनावे से लेकर जन्म, जूते, शारीरिक बनावट, आने-जाने और करीब सहयोगियों तक की जानकारी शामिल है।
यह प्रक्रिया केवल राहुल गांधी के साथ ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा प्रमुख अमित शाह के साथ भी अपनाई गई।
दो पेज वाले प्रोफॉर्मा को आमतौर पर एक सब इंस्पेक्टर द्वारा ही भरा जाता है। 27 अगस्त 2001 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भरे गए प्रोफॉर्मा के अनुसार वह हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा बोलते हैं। पहनावे वाले खंड में लिखा है कि वाजपेयी धोती, कुर्ता, जवाहर जैकेट और पैरों में चप्पल पहनते हैं।
'राहुल की जासूसी' के बहाने, नेताओं का मजेदार सच
लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को वाजपेयी का करीबी सहयोगी दर्शाया गया है। पेशे वाले कॉलम में वाजपेयी को कवि और राजनीतिज्ञ बताया गया है। पेज नंबर 2 में पूर्व की गतिविधियों वाले कॉलम में पुलिस सब इंस्पेक्टर ने वाजपेयी के बारे में लिखा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में शादी नहीं की।
इसी तरह वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के बारे में लिखा गया है कि वह मूंछें रखते हैं और हिंदी तथा अंग्रेजी बोलते हैं। वह सूट, कुर्ता पायजामा पहनते हैं। वाजपेयी और वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज उनके करीबी सहयोगी हैं। आडवाणी का यह प्रोफॉर्मा 8 जनवरी 2002 को भरा गया था।
सुषमा के प्रोफॉर्मा के मुताबिक वह साड़ी, सैंडल पहनती हैं। साथ ही वह बिंदी भी लगाती हैं। उनका हेयर स्टाइल साधारण है और वह हिंदी और अंग्रेजी बोलती हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रोफॉर्मा के मुताबिक, वह बॉयोटेक्नोलॉजी में बीएससी हैं और उनका पेशा बिजनेस है। शाह मूंछें और दाढ़ी और आंखों पर चश्मा लगाते हैं। इसके अलावा वह हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती भाषा बोलते हैं।
प्रोफाइलिंग प्रक्रिया में बदलाव कर सकती है सरकार
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के घर जाकर दिल्ली पुलिस के जानकारी हासिल करने को लेकर मचे बवाल के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा प्रोफाइलिंग प्रक्रिया में बदलाव के संकेत दिए।
लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के विरोध के बाद संसद परिसर में गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि पुलिस इस प्रोफॉर्मा का वर्ष 1957 से पालन कर रही है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से इसमें बदलाव किया जा सकता है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा प्रोफाइलिंग प्रक्रिया की समीक्षा कर सकती है। समीक्षा के बाद प्रोफॉर्मा से अवांछित सवालों को हटाया जा सकता है और मौजूदा वक्त के लिहाज से कुछ नए सवाल जोड़े जा सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि सांसदों के मामले में लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को भी विश्वास में लिया जाएगा। गृह मंत्रालय के जल्द ही इस प्रक्रिया की समीक्षा के लिए बैठक बुलाए जाने की उम्मीद है।