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'हिंदुस्तान को जर्मनी बनाना चाहते हैं खाकी नेकर वाले'

Sun, 06 Dec 2015 09:24 AM IST
Updated Sun, 06 Dec 2015 09:24 AM IST
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Yogendra yadav says, European model 'Hindu, Hindu and Hindustan'.

राजनीतिक विश्लेषक एवं चिंतक योगेंद्र यादव ने कहा कि खाकी नेकर वाले हिंदुस्तान को जर्मनी बनाना चाहते हैं। हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान यूरोपीय मॉडल है। हिंदुस्तान विविधताओं का देश है और इसके आदर से ही देश बचा है जो इसे खत्म करेगा, वह हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन होगा।

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योगेंद्र यादव शनिवार को एएमयू के कैनेडी हाल में एएमयू कल्चरल एजूकेशन सेंटर के तत्वावधान में इंडिया एज एन आइडिया के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने जर्मनी एवं फ्रांस आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि यूरोप में भाषा एवं संस्कृति के आधार पर राष्ट्र बने। मतलब एक तरह के लोग मिलकर राष्ट्र बनाएंगे।
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उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरह के लोग (समान भाषा एवं संस्कृति) नहीं हो तो... फिर जवाब दिया कि मार-मार कर फ्रेंच या जर्मन बनाएंगे। जर्मनी को इसी स्टाइल में बनाया गया और जो नहीं बने उन्हें भगा दिया।
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उन्होंने कहा कि जब अंग्रेज भारत में आए तो उन्हें लगता था भारत एक राष्ट्र कैसे बनेगा, क्योंकि यहां भिन्न भाषा एवं संस्कृति के लोग रहते है।

'यूरोप में बने हैं एक भाषा-संस्कृति के आधार पर राष्ट्र'

Yogendra yadav says, European model 'Hindu, Hindu and Hindustan'.

योगेंद्र यादव ने कहा कि यूरोपीय मॉडल के विपरीत हिंदुस्तान ने मल्टी कल्चर नेशन अपनाया और यहीं हमारी सबसे बड़ी विशेषता थी और चुनौती भी। बेचारे खाकी नेकर वालों की सोच में उनकी बेचारगी झलकती है। वे समझते है कि बिना यूरोपीय आइडिया के मुल्क नहीं बन सकता। ये लोग गलत मुल्क में पैदा हो गए हैं। इस मुल्क की मिट्टी को बदल नहीं सकते।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को बनाना पूरे यूरोप को एक कंट्री बनाने के समान था। यूरोप से कही अधिक विविधता हिंदुस्तान में है।

उन्होंने कहा कि विविधता का आदर नहीं करने का परिणाम हमारे सामने है और रूस 15-16 टुकड़े में बंट चुका है। श्रीलंका सबसे अच्छा उदाहरण है। 1950 के दशक में दक्षिण एशिया का सबसे अच्छा मुल्क था। आज श्रीलंका कहने को एक है, मन टूट चुका है।

संकीर्ण मानसिकता के लोग हिंदुस्तान को श्रीलंका की राह पर ले जाना चाहते है। उन्हें पता नहीं है कि वे क्या करना चाहते हैं। यादव ने कहा कि डेमोक्रेसी यूरोप से उधार लिया गया है। उधार लेना कोई शर्म की बात नहीं है।

योगेंद्र यादव ने कहा कि अंग्रेजी जबान में हिंदुस्तान के कितने शब्द आ गए हैं। इससे वह छोटी नहीं हो गई है। दिक्कत यह है कि हमारे पास छलनी नहीं है कि क्या लेना है और क्या छोड़ना है। यूरोप में डेमोक्रेसी अमीरों का शौक था। भारत में गरीबों की जरूरत है। हमारे देश का डेमोक्रेसी अंतिम पायदान पर खड़े आदमी से संबंध रखता है। यह आइडिया भारत की है।

'विविधता पर चोट करने वाला देश का दुश्मन'

Yogendra yadav says, European model 'Hindu, Hindu and Hindustan'.
हिंदुस्तान में जब डेमोक्रेसी आई तो चुनौती थी कि इतने बड़े देश में जहां 70 प्रतिशत से अधिक लोग अशिक्षित है, गरीब है और खाने को रोटी नहीं है, कैसे स्वीकार करेंगे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि भारत में डेमोक्रेसी का प्रयोग सफल होगा। लेकिन आज मुल्क ने जो फ्रेम बनाकर रखा है, जो अन्य जगह देखने को नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि संयोग से भारत में पैदा होने से भारत पर गर्व नहीं किया जा सकता। इसके लिए डेमोक्रेसी को और बेहतर बनाना होगा। इंडिया ने भी इंडिया के आइडिया को अभी ठीक से नहीं अपनाया है। आज हिंदुस्तान की विविधता खतरे में है।

हमें अपने अंदर झांककर विविधता पर गौर करना होगा। इस्लाम में भी विविधता है। तमाम तरह की विविधता को बचाना होगा। खासकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक। अंग्रेजी बोलने से काम नहीं चलेगा। स्थानीय भाषा एवं संस्कृति को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि जब देश से सारे धर्म चले जाएंगे तो धर्म निरपेक्षता के लिए क्या बचेगा। अमीन अहमद ने संचालन एवं प्रो. मिर्जा असमर बेग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

छात्रों के एक सवाल के जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा कि सऊदी अरब का नकल कर इस देश में इस्लाम को स्ट्रांग नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में इस्लाम में बहुत विविधता है। यही इसकी ताकत है।

लेखक-साहित्यकारों द्वारा अवार्ड लौटाने जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हर कोई अपने तरीके से अपनी बात रखता है। उसका सम्मान करना चाहिए। शाम में उन्होंने छात्रों से काफी समय तक गुफ्तगू की और उनके सवालों का जवाब दिया।
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