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भाजपा की राह में कांटे बिछा रहे हैं येदियुरप्पा
हरीश लखेड़ा/बेलगाम
Updated Wed, 01 May 2013 12:19 AM IST
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कर्नाटक जनता पार्टी (केजीपी) बनाकर चुनावी मैदान में डटे येदियुरप्पा भले ही भाजपा नेतृत्व के निशाने पर हों, लेकिन पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं कि उनके साथ रहने से भाजपा को सत्ता में लौटने से कोई नहीं रोक सकता था।
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पार्टी भी महसूस करने लगी है कि येदुयुरप्पा की पार्टी खुद भले ही कोई खास चमत्कार न कर पाए लेकिन उसने कर्नाटक में दोबारा कमल खिलाने की पार्टी की राह में कांटे तो बिछा ही दिए हैं।
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भाजपा को सत्ता विरोधी लहर के मुकाबले येदियुरप्पा के अलग होने से ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है। पार्टी हाईकमान भी मानने लगा है कि इस चुनाव में कांग्रेस को जो भी लाभ होगा, वह भाजपा की कमियों से होगा। इसलिए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह लगभग सभी चुनावी सभाओं में कहते हैं कि भाजपा से कुछ गलतियां हुई हैं।
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दक्षिण में भाजपा की पहली सरकार बनी थी, लेकिन कुछ लोग आपस में लड़ते रहे। पांच साल के कार्यकाल में तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े। इसका भाजपा को दुख है।
हालांकि राजनाथ इस सबके लिए येदियुरप्पा को दोषी ठहराना नहीं भूलते हैं। राजनाथ कहते हैं कि कांग्रेस भले ही भ्रष्टाचार से समझौता कर ले, भाजपा नहीं करेगी। इसलिए पार्टी के निशाने पर कांग्रेस के साथ येदियुरप्पा भी हैं।
जबकि एक बार धोखा खाने के बावजूद भाजपा अब भी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की जनतादल (सेक्युलर) के प्रति कुछ नरम दिख रही है क्योंकि चुनाव बाद की उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को लेकर भाजपा की नजर जद (एस) पर टिकी है।
पार्टी संगठन में दो फाड़ हो जाने के बाद भाजपा की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आए। ऐसा होने पर जद (एस) के साथ मिलकर सत्ता में लौटने का रास्ता बन सकता है।
हालांकि पार्टी का एक वर्ग चुनाव बाद येदियुरप्पा के भी साथ आने की उम्मीद किए हुए है। यहां के नेता व कार्यकर्ता येदियुरप्पा को अलग राह पर जाने के लिए मजबूर करने के लिए आडवाणी कैंप खासतौर पर बंगलूरू से सांसद अनंत कुमार को जिम्मेदार ठहराते हैं।
बहरहाल, प्रदेश विधानसभा की 224 सीटों में भाजपा को इसके लिए कम से कम 80 सीटें लानी होंगी। पार्टी का मानना है कि यदि कांग्रेस 75 सीटों से नीचे रुक जाती है तो कर्नाटक में दोबारा कमल खिल जाएगा।
लेकिन यदि संख्या बल में कांग्रेस एक सीट से भी आगे निकल जाती है तो भाजपा को विपक्ष में बैठना होगा। इसलिए चुनाव में भाजपा की कोशिश सबसे बड़ी पार्टी बनने की है।
मगर मौजूदा राजनीतिक हकीकत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि कांग्रेस इस चुनाव में भाजपा को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरने की प्रबल दावेदार है।