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भटकल कर रहा नए नामों का खुलासा
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Mon, 02 Sep 2013 01:20 AM IST
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इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के गिरफ्तार मास्टरमाइंड आतंकी यासीन भटकल ने ऐसे कई नाम लिए हैं जो खुफिया एजेंसियों के लिए बिल्कुल नए हैं।
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यही वजह है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की इस तहकीकात में महाराष्ट्र एटीएस, हैदराबाद की विशेष फोर्स ऑक्टोपस, उत्तर प्रदेश की एसटीएफ, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और कर्नाटक का विशेष पुलिस दस्ता एक साथ शामिल होने की कोशिश में हैं।
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ऐसी स्थिति बन रही है कि यासीन के नए खुलासे के आधार पर राज्यों की पुलिस को धमाकों से जुड़ी एफआईआर और चार्जशीट में उन आरोपियों के नामों में फेरबदल करनी पड़े जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
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यासीन के खुलासे से सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद के नए चेहरे की कई परतें उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
दिल्ली में चल रही शुरुआती पूछताछ के बाद यासीन को उन जगहों पर ले जाया जाएगा जहां उसने धमाके किए हैं।
गृह मंत्रालय और आईबी की सहमति से यह व्यवस्था बनाई जा रही है कि यासीन को घटना स्थल पर ले जाने के दौरान उस राज्य की पुलिस एनआईए के साथ होगी। इसी दौरान उस राज्य की पुलिस अपने यहां हुए धमाकों के बारे में यासीन से अलग से पूछताछ करेगी।
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इसी क्रम में उन युवकों के बारे में भी पूछताछ की जाएगी जिन्हें उस धमाके के आरोप में देश के अलग-अलग शहरों से गिरफ्तार किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि संभव है कि जिसे राज्य पुलिस मुख्य आरोपी बता रही हो वह कोई छोटा सहयोगी निकले और उसकी जगह नए आतंकी का नाम सामने आ जाए।
सूत्रों ने बताया कि यासीन से अलग से पूछताछ के लिए हरेक राज्य पुलिस को यासीन को रिमांड पर लेना होगा। यासीन द्वारा किए गए धमाकों की अलग अलग तहकीकात में काफी वक्त लग जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि यासीन ने जिन नए आतंकियों के नाम लिए हैं वह कभी खुफिया एजेसियों के राडार पर नहीं आए।
एजेंसियों को इस बात का भी शक है कि शातिर यासीन इस नए नामों से कुछ खास चेहरों को बचाने की कोशिश भी कर रहा हो। आशंका यह भी जताई जा रही है कि उसकी यह चाल तहकीकात को सुलझाने के बजाय और उलझा दे।
नेपाल से भारत आते रहते थे यासीन और हड्डी
यासीन भटकल और असदुल्लाह उर्फ हड्डी नेपाल से अक्सर भारत आते रहते थे। ऐसा करने में कभी उन्हें कोई दिक्कत पेश नहीं आई थी।
पूछताछ में खुद उन्होंने यह खुलासा किया है। सीमा पार करने के लिए पासपोर्ट या किसी अन्य दस्तावेज की जरूरत नहीं होने से उनका यह काम और आसान था।