डेथ वारंट को याकूब मेमन ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
फांसी से चंद कदम दूर याकूब मेमन ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी डेथ वारंट को चुनौती दी है। मेमन को 30 जुलाई को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की गई है।
याचिका में मेमन ने कहा है कि 29 अप्रैल को ही टाडा कोर्ट ने डेथ वारंट जारी किया था, तब तक उसके द्वारा तमाम कानूनी विकल्पों का उपयोग नहीं किया गया था।
सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद टाडा अदालत ने डेथ वारंट जारी कर दिया। 53 वर्षीय याकूब ने याचिका में कहा है कि 30 जुलाई के लिए जारी डेथ वारंट नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत के खिलाफ है।
इसे जारी करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। मालूम हो कि गत 27 मई को न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने परिवार के सात सदस्यों की हत्या में दोषी ठहराई गई शबनम और उसके प्रेमी सलीम के डेथ वारंट को निरस्त कर दिया था।
अदालत की दलील
अदालत का कहना था कि तमाम कानूनी विकल्पों का उपयोग करने के बाद ही दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होना चाहिए। निचली अदालत को डेथ वारंट जारी करने से पहले दोषियों को नोटिस भेजा जाना जरूरी होता है, जिससे कि दोषी वकीलों से कानूनी मदद ले सकें।
मालूम हो कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने याकूब मेमन की सुधारात्मक याचिका खारिज कर दी थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में 13 धमाके हुए थे। इनमें 257 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 लोग घायल हो गए थे।
पत्नी और बेटी ने जेल में की मेमन से मुलाकात
याकूब मेमन की पत्नी और बेटी ने बृहस्पतिवार को उससे नागपुर जेल में मुलाकात की। उनके साथ मेमन परिवार के कई और सदस्य भी मौजूद थे। यह मुलाकात एक घंटे से अधिक समय तक चली।
सूत्रों के अनुसार मेमन की पत्नी राहिन, बेटी जुबैदा तथा रिश्तेदार इकबाल समेत परिवार के अन्य लोग मुंबई से सुबह ही ट्रेन से नागपुर पहुंचे थे। सभी ने सुबह करीब नौ बजे कड़ी सुरक्षा के बीच याकूब मेमन से भेंट की।
यह मुलाकात पहले से तय थी। मेमन के परिजनों ने चार जुलाई को ही ट्रेन के टिकट बुक करा लिए थे। सुबह करीब 11 बजे सभी एक निजी वाहन से जेल से निकल गए। मेमन से इस हफ्ते उसके दिल्ली के वकील सुबेल फारूक, अधिवक्ता अनिल जेदाम और चचेरा भाई उस्मान मेमन भी मिल चुके हैं।
मुंबई हमलों के दोषी याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस 21 जुलाई को उसकी क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी। फिलहाल उसने महाराष्ट्र के राज्यपाल के पास दया याचिका दायर की हुई है।