{"_id":"17a6d124-925d-11e2-b06d-d4ae52bc57c2","slug":"world-water-day-2013","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूं ही निचोड़ते रहे तो सूख जाएगी धरती की कोख","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
यूं ही निचोड़ते रहे तो सूख जाएगी धरती की कोख
आगरा/ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2013 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां इतिहास में पढ़ा करेंगी कि आगरा में कभी पानी था।
विज्ञापन
मुगलिया सल्तनत ने पानी की कमी के कारण अपनी राजधानी फतेहपुर सीकरी से आगरा स्थानांतरित कर दी लेकिन आने वाली पीढ़ियों के सामने मजबूरी होगी कि वह कहां जाएं।
हालात को नियंत्रित करने के लिए पहल नहीं हुई तो कुछ दशकों में आगरा का पानी सूख जाएगा।
लगातार गिरते भू-जल स्तर पर कोई भी संवेदनशील नहीं है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने तीन सालों से आंकड़े जारी नहीं किए।
वहीं पिछले पांच सालों में आगरा की भू-जल उपलब्धता तेजी से गिर रही है। पिछले पांच सालों में पानी का दोहन इस कदर बढ़ा कि हम स्टेटिक जोन यानी पानी के रिजर्व लेवल का प्रयोग करने लगे हैं।
विज्ञापन
परिणामस्वरूप आगरा में भू-जल स्तर 1.50 मीटर प्रति वर्ष की दर से गिर रहा है। खतरनाक बात यह कि बारिश के बाद भी गिरावट जारी है।
विश्व जल दिवस की शुरुआत
विश्व जल दिवस की अंतरराष्ट्रीय पहल रियो डि जेनेरियो में 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास सम्मेलन (यूएनसीईडी) में की गई थी। वर्ष 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरी दुनिया में जल दिवस के मौके पर जल संरक्षण पर जागरूकता फैलाने का अभियान शुरू किया गया।
विज्ञापन
कहां कितना जल
धरती पर एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है।
97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है।
1.5 प्रतिशत पानी बर्फ के रूप में है।
सिर्फ एक फीसदी ताजा पानी नदी, तालाब, झरनों और झीलों में है जो पीने लायक है।
इस एक प्रतिशत पानी का 60 वां हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है।
40 वां हिस्सा पीने, भोजन, नहाने और साफ-सफाई में खर्च होता है।
जल से जुड़े पहलू
22 लाख मौतें दुनिया में प्रतिवर्ष होती हैं जल जनित बीमारियों के कारण।
विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 लोगों को साफ पानी नहीं मिल पाता है।
18 लाख बच्चे दम तोड़ देते हैं प्रतिवर्ष पानी की कमी और बीमारियों के कारण।
04 करोड़ भारतीय जलजनित बीमारियों से ग्रस्त होते हैं.
06 लाख बच्चों की मौत होती है देश में पानी की कमी और प्रदूषित पानी के कारण।
80 फीसदी कचरा सीधे बहाया जाता है देश की नदियों में।
75 फीसदी जल प्रदूषण का कारण सीवेज है।
70 फीसदी तक पानी बर्बाद हो जाता है लीकेज के कारण।
01 अरब लीटर सीवेज वाटर गंगा में बहाया जाता है।
2800 गुना बढ़ गया है गंगा में बैक्टिरिया का स्तर।
57 फीसदी कचरा यमुना में बहाया जाता है दिल्ली में।
3.53 मिलियन लीटर सीवेज वाटर यमुना में हर रोज बहाया जाता है।
80 फीसदी यमुना दिल्ली में ही प्रदूषित होती है।