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इन चुनावों में अमेरिका के बाद हमारा ही है नंबर

Mon, 10 Mar 2014 11:25 AM IST
Updated Mon, 10 Mar 2014 11:25 AM IST
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World's second most expensive election in india

लोकसभा चुनाव में इस बार राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान में दिल खोलकर खर्च करने जा रहे हैं। तमाम प्रत्याशी भी अपनी छवि चमकाने के लिए पैसे को पानी की तरह बहाने से पीछे नहीं हटेंगे।

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इन आम चुनावों में प्रचार अभियान पर खर्च के मामले में न सिर्फ पिछले सभी रिकॉर्ड टूटेंगे, बल्कि भारत इस मामले में अमेरिका में पिछले राष्ट्रपति चुनाव में हुए भारी भरकम खर्च की होड़ भी करता दिखेगा।

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05 अरब रुपये से ज्यादा का खर्चा

World's second most expensive election in india

एक अनुमान के मुताबिक लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान पर कुल खर्च का आंकड़ा 4.9 अरब डॉलर यानी 305 अरब रुपये से ऊपर जा सकता है। 2012 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में प्रचार के दौरान सात अरब डॉलर यानी 420 अरब रुपये खर्च हुए थे।

इस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद प्रचार अभियान पर खर्च के मामले में दुनिया में भारत का लोकसभा चुनाव सबसे खर्चीला होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खर्च से सुस्ती के भंवर में फंसी भारतीय अर्थव्यवस्था में भी जुंबिश आ सकती है।

अमेर‌िका के बाद सबसे ज्यादा खर्चा

World's second most expensive election in india

भारत में प्रचार के दौरान मतदाताओं को लिफाफे में भरकर रुपये पकड़ाने से लेकर करोड़ों रुपये के विज्ञापन अभियान चलाना शामिल है।

चुनाव खर्च पर नजर रखने वाले सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज का मानना है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान पर 300 अरब रुपये से ज्यादा खर्च हो सकते हैं।

यह खर्च 2009 के लोकसभा चुनाव से तीन गुना ज्यादा होगा। भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी देश भर में रैलियां कर रहे हैं। पूरे देश में उनके समर्थन में विज्ञापन दिए जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की भी रैलियां हो रही हैं।

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अर्थव्यवस्था के बुरे हाल

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इसी तरह सपा, बसपा से लेकर अन्य दलों के नेता भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के चेयरमैन एन. भास्कर राव का कहना है कि राजनीतिक दलों की ओर से प्रचार अभियान पर किया गया खर्च अर्थव्यवस्था में रफ्तार पैदा कर सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था 1980 के दशक के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। अर्थशास्त्रियों ने मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान विकास दर पांच फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

प्रचार के कई तरीके

World's second most expensive election in india
संसद सीट पर लड़ रहे प्रत्याशी को सिर्फ 70 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति है, लेकिन अनुमान के मुताबिक एक उम्मीदवार जीत हासिल करने के लिए इससे 10 गुना अधिक तक खर्च कर देता है।

इसमें रैलियों का खर्च, मीडिया अभियान और मतदाताओं को लुभाने के लिए नकदी देने से लेकर अन्य तमाम तरीके शामिल हैं।
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