फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Women workers of closed Tea gardens turning into sex workers

देह व्यापार में उतर रहीं बंद टी गार्डेंन की युवतियां

Fri, 05 Feb 2016 09:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 05 Feb 2016 09:14 PM IST
विज्ञापन
Women workers of closed Tea gardens turning into sex workers

उत्तर बंगाल में स्थित कई चाय बागानों में तालाबंदी के चलते वहां रहने वाले 16 से 18 साल की युवितयां मजबूरन देह व्यापार के धंधे में उतर रही हैं। वह ऐसा परिवार का पेट पालने के लिए कर रही हैं। बंद बागानों में मजदूरी या राशन न मिलने की वजह से वहां रहने वाली कई युवतियों ने यौनकर्मी बनकर पैसे कमाने के लिए स्कूल जाना छोड़ दिया है।

विज्ञापन


डंकन समूह की बीरपाड़ा चाय बागान इस मामले में सबसे बदतर है। ज्यादातर बंद बागानों में ग्राहकों को सरेआम इन युवतियों के साथ मोल-तोल करते देखा जा सकता है। लोगों को लुभाने के लिए युवतियां भी उत्तेजक कपड़े पहने नजर आती हैं। राज्य सरकार ने हालांकि बंद बागानों में दो रुपए किलो की दर से चावल की सप्लाई शुरू की है। लेकिन यह मदद नाकाफी ही साबित हो रही है।
विज्ञापन


देह व्यापार के धंधे में उतरने वाली एक युवती सवाल करती है कि आखिर हम सरकार की दया पर कब तक जीवित रह सकते हैं? हमें जीवित रहने के लिए चावल के अलावा दूसरी कई चीजों की भी जरूरत पड़ती है। वह कहती है कि अब देह व्यापार की कमाई से उसके पूरे परिवार को रोजाना भरपेट भोजन व कपड़ा तो मिलने ही लगा है, भविष्य के लिए कुछ पैसे भी बचने लगे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

काम शर्मनाक,लेकिन मजबूर हैं

Women workers of closed Tea gardens turning into sex workers

इन युवतियों को इलाके से गुजरने वाले नेशनल हाइवे-31 के किनारे बने ढाबों के आस-पास ग्राहकों की तलाश में मंडराते देखा जा सकता है। युवतियों का कहना है कि उनके ग्राहकों में ज्यादातर ट्रक चालक शामिल हैं।

एक अन्य युवती बताती है कि किसी-किसी रात को वह पांच सौ रुपए तक कमा लेती है। दलाल को इसमें से कुछ रकम मिलती है। लेकिन बड़ी रकम हमारे पास रहती है। उसका सवाल है कि आखिर उसे इतना पैसा बिना वजह के कोई क्यों देगा?

आरएसपी की चाय मजदूर यूनियन के नेता गोपाल प्रधान भी तेजी से बढ़ती इस समस्या की बात कबूल करते हैं। वे कहते हैं कि यह हमारे लिए शर्मनाक स्थिति है। लेकिन हम मजबूर हैं। इलाके के बंद चाय बागानों के खुलने की निकट भविष्य में कोई संभावना नहीं होने की वजह से इन युवतियों का भविष्य अंधकारमय ही लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed