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पंचायतों में महिला आरक्षण 50 फीसदी करने की तैयारी

Fri, 05 Feb 2016 05:54 AM IST
Updated Fri, 05 Feb 2016 05:54 AM IST
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women reservation in panchayat elections

मोदी सरकार पंचायत चुनावों में महिला आरक्षण को 33 से बढ़ा कर 50 फीसदी करने के लिए संसद के बजट सत्र में संशोधन प्रस्ताव लाएगी। साथ ही महिला उम्मीदवारों के वार्ड आरक्षण का कार्यकाल भी बढ़ा कर दो बार करने पर विचार चल रहा है। कुछ राज्य पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण पहले से ही दे रहे हैं। लेकिन संविधान में संशोधन किए जाने के बाद यह देश भर में लागू हो जाएगा।

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केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र सिंह ने पीईएसए (पेसा) एक्ट लागू करने पर आयोजित एक कार्यशाला में पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ा कर 50 फीसदी करने के सरकार के मकसद की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस वक्त महिला उम्मीदवारों के लिए पांच साल तक एक वार्ड आरक्षित रखा जाता है।
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अब इसे दस साल तक आरक्षित करने पर विचार हो रहा है ताकि महिलाओं को सार्वजनिक काम करने और अपने नेतृत्व को मजबूती देने का मौका मिले।  सिंह ने कहा कि पंचायत चुनावों में महिला आरक्षण को बढ़ा कर 50 फीसदी करने का संविधान संशोधन संसद के आगामी यानी बजट सत्र में पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि सरकार के इस संशोधन का कोई भी राजनीतिक पार्टी विरोध नहीं करेगी। संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।

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उम्र सीमा घटाने पर भी सरकार कर रही विचार

women reservation in panchayat elections

सिंह ने बताया कि विधवा पेंशन के लिए उम्र सीमा घटाने पर भी सरकार विचार कर रही है। उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी लेकिन यह जरूर कहा कि इसकी विस्तृत रूप-रेखा तैयार की जा रही है और यह अभी बेहद शुरुआती दौर में है। अभी सिर्फ 40 साल से ऊपर की विधवाओं को ही पेंशन मिल रही है।

वीरेंद्र सिंह ने राज्यों की ओर से पीईएसए एक्ट,1996 को लागू करने की जोरदार वकालत की ताकि आदिवासियों के कल्याण के काम को रफ्तार मिल सके। उन्होंने कहा कि अब आदिवासी आबादी अपने विकास के लिए ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती। उन्होंने भारत के आदिवासी समुदायों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने मूल्यों और संस्कृति को बनाए रखा है।

इसलिए साम्राज्यवादी ताकतें उनको मिटा नहीं सकीं। जबकि दुनिया भर में आदिवासियों के साथ ऐसा हो चुका है। पीईएसए एक्ट लागू करने पर आयोजित कार्यशाला में दस राज्यों के पंचायती राज और आदिवासी कल्याण मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पंचायती राज राज्य मंत्री निहाल चंद ने कहा कि इस एक्ट को लागू करने की दिशा में पिछले 20 साल के दौरान यह पहली कार्यशाला है। भूरिया कमेटी ने 20 साल पहले पेसा एक्ट के बारे में रिपोर्ट पेश की थी लेकिन अभी तक यह लागू नहीं हो पाया है।

कई राज्यों में लागू है 50 फीसदी आरक्षण

women reservation in panchayat elections

पंचायत चुनावों में महिला उम्मीदवारों के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था बिहार समेत कई राज्यों में लागू है। बिहार में 2005 में पंचायती चुनावों में महिला उम्मीदवारों के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी। उत्तराखंड, हिमाचल और मध्य प्रदेश में भी यह व्यवस्था लागू है।

पंचायत (एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरियाज) एक्ट यानी पीईएसए एक्ट ग्राम सभाओं को स्थानीय आबादी की परंपराओं, रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधनों और विवाद सुलझाने के उनके तरीकों को संरक्षित करने का अधिकार देता है।

इस एक्ट के तहत ये सभाएं सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं को मंजूरी भी दे सकती हैं। यह यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जारी करने से लेकर गरीबी दूर करने और अन्य योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों के लिए लाभार्थियों का भी चयन कर सकती है।

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