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महिलाओं के लिए उम्रकैद की सजा 14 साल काफी

Tue, 19 Mar 2013 11:26 PM IST
मुंबई/एजेंसी
मुंबई/एजेंसी Updated Tue, 19 Mar 2013 11:26 PM IST
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women need serve 14 yrs for lifer

महाराष्ट्र की जेल में बंद महिला कैदियों के लिए उम्रकैद की सजा पूरी करने के लिए 14 साल का समय पर्याप्त है। जबकि पुरुषों को 14 से लेकर 28 साल तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होते हैं।

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बांबे हाई कोर्ट के जस्टिस अभय थिप्से और पीवी हरदास ने 15 मार्च को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रही उषा उपाध्याय की याचिका पर यह फैसला सुनाया है।
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जस्टिस थिप्से और जस्टिस पीवी हरदास ने कहा कि हमारे विचार में 2010 गाइडलाइंस की कैटेगरी 1 में महिलाओं के सभी अपराध आ जाते हैं और यह मामला भी इसी श्रेणी में फिट बैठता है।
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इसलिए हम 4 सितंबर, 2012 को महाराष्ट्र सरकार द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाते हैं। याचिकाकर्ता को 2010 गाइडलाइंस की कैटेगरी 1(बी) के तहत रखकर ही उसे रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि सरकार की तरफ अरुणा पाई ने दलील दी कि महिला एक सुपारी किलर है और इसलिए उसे ज्यादा कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

उषा उपाध्याय ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए केंद सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित सजा से पहले जेल से रिहा होने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता 10 फरवरी, 1999 से जेल में है और अब तक 13 साल की सजा काट चुकी है। जब उसे सजा सुनाई गई थी, तो उस समय 1992 के दिशा निर्देशों को आधार बनाया गया था, लेकिन बाद में 2010 में संशोधित गाइडलाइंस तय किए गए।

2010 के दिशा निर्देश की श्रेणी 6(ए) के तहत कैदी को कम से कम 28 साल जेल में बिताने होते हैं जबकि 1992 के दिशा निर्देश की श्रेणी 5(बी) में भी यही प्रावधान है।


उषा उपाध्याय का कहना है कि उसे गलत श्रेणी में रखा गया है और वह 2010 गाइडलाइंस की कैटेगरी 1(बी) के तहत रखे जाने की हकदार है। इसके तहत समय से पहले रिहा होने की योग्यता जेल में 14 साल की सजा है।

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