जज से की बदसलूकी पड़ी महंगी, महिला को जेल
मनमुताबिक आदेश न मिलने पर जज से अभद्रता करने तथा झूठे आरोप लगाने पर हाईकोर्ट ने महिला को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया है।
सोनभद्र की आरती चौरसिया को इसके लिए पांच दिन कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की दो माह की मोहलत भी दी है तबतक सजा के अमल पर रोक रहेगी।
अवमानना मामले पर न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने सुनवाई की। आरती चौरसिया के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने का मामला सोनभद्र जिला अदालत द्वारा हाईकोर्ट को संदर्भित किया गया था। आरोप है कि आरती ने एसीजेएम अदालत में 156(3) के तहत प्रार्थनापत्र दाखिल किया था।
कैद के साथ दो हजार का जुर्माना भी
एसीजेएम ने प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया तो उन्होंने पीठासीन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए टिप्पणियां की जो न्यायालय की गरिमा के विपरीत थी। उन्होंने न्यायिक कार्य में भी बाधा पहुंचाई।
अपने बचाव में आरती चौरसिया ने कहा कि उन्होंने अदालत ने 156(3) के तहत कोई प्रार्थनापत्र नहीं दिया था। कागज पर उसके अंगूठे का निशान नहीं है।
अदालत ने एक सादे कागज आरती के अंगूठे का निशान लेकर प्रार्थनापत्र पर लगे अंगूठे के निशान से मिलान कराया तो एक ही निकले। कोर्ट ने उसे अवमानना का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।