30 देशों की 20 करोड़ महिलाओं ने सहा 'खतना का दर्द'
दुनिया भर में कम से कम 20 करोड़ लड़कियों और महिलाओं को खतना के असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा है। एक कड़वी हकीकत यह भी है कि इन महिलाओं में से करीब साढे़ चार करोड़ तो सिर्फ वे लड़कियां हैं, जिनकी उम्र महज 14 साल से भी कम है।
खतना जैसी कुप्रथा से गुजरने वाली ये 20 करोड़ महिलाएं दुनिया के 30 देशों से हैं, जिनमें से आधे तो मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया से ही हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी कर इस भयावह हकीकत को उजागर किया है। महिला खतना के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अंतरराष्ट्रीय दिवस से पहले संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनीसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में जितना अनुमान लगाया गया था, उससे कहीं ज्यादा करीब सात करोड़ लड़कियां और महिलाओं का खतना किया गया था।
यहां 11 की उम्र तक पहुंचने से पहले कर दिया जाता खतना
इसकी अहम वजह यह थी कि कुछ देशों की जनसंख्या वृद्धि काफी बढ़ी है और
इंडोनेशिया के नए आंकडे़ मिले हैं। इंडोनेशिया में तो 11 की उम्र तक
पहुंचने से पहले ही देश की आधी से ज्यादा लड़कियों का खतना कर दिया जाता
है।
यूनीसेफ की उप कार्यकारी निदेशक गीता राव गुप्ता कहती हैं,
खतना जैसी कुप्रथा दरअसल महिलाओं के अधिकारों का हनन है। हालांकि, यूनीसेफ
ने यह चेतावनी भी दी है अगर इस कुप्रथा पर रोक नहीं लगाई गई तो अगले 15
सालों में इन आंकड़ों में इजाफा होगा। इन 30 देशों में से ज्यादातर
अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया से हैं।
2030 तक है खतना समाप्त करने का लक्ष्य
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर, 2012 में दुनिया भर में खतने की कुप्रथा पर पाबंदी लगाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने बीते साल सितंबर में ही अपने लिए नए लक्ष्य तय किए थे, जिसमें से दुनिया भर से 2030 तक खतना की कुप्रथा को खत्म करना भी था।
दकियानूसी प्रथा में है लोगों को यकीन
खतना जैसी कुप्रथा में यकीन रखने वाले लोग यह मानते हैं कि इससे गुजरने वाली महिलाओं की प्रजनन क्षमता और यौन क्षमता में इजाफा होता है। सोमालिया, गिनी और जिबूती जैसे देशों में महिला खतना की स्थिति बेहद खराब है। कई देशों में तो बच्चियों को पांच की उम्र से पहले ही खतना कर दिया जाता है।
भारत समेत कई देशों के आंकडे़ नहीं शामिल
यूएन का कहना है कि कई और देशों में भी खतना होता है, मगर उनका अध्ययन नहीं कराया जा सका है। जिन 30 देशों में सर्वे कराए गए हैं, उनमें भारत, मलयेशिया, ओमान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात के अलावा ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के देशों के आंकड़े शामिल नहीं हैं।