{"_id":"327aca42-24a7-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"women-do-not-celebrate-karva-chauth-for-husbands-safety","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां करवा चौथ मनाने से उजड़ जाता है सुहाग","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
यहां करवा चौथ मनाने से उजड़ जाता है सुहाग
करनाल/ब्यूरो
Updated Fri, 02 Nov 2012 05:38 PM IST
विज्ञापन
एक ओर पूरे देश में महिलाओं व युवतियों पर करवा चौथ को लेकर खुमार है, वहीं करनाल के तीन गांव ऐसे हैं जहां सैकड़ों सालों से ये व्रत नहीं मनाया जाता है। कतलाहेडी, गोंदर व औंगद के लोगों की मान्यता है कि चौहान परिवार की महिलाएं ये व्रत करेंगी तो उनका सुहाग उजड़ जाएगा।
विज्ञापन
गोंदर के चौहान (ठाकुर) परिवार की बहुएं परंपरा को निभा रही हैं। बताया जाता है कि सदियों से यहां के चौहान परिवार श्रापित हैं और पूर्व में हुई भूल का आज भी पश्चाताप कर रहे हैं। हालांकि इन गांवों से विवाह होकर गईं लड़कियां अपने ससुराल में करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों को मिला था श्राप
बताते हैं कि करीब 600 साल पहले राहड़ा की लड़की की शादी गोंदर के एक युवक से हुई थी। मायके में करवा चौथ से पहले की रात उसे सपना आया कि उसके पति की हत्या हो गई है और उसका शव बाजरे की गठरियों में छुपा रखा है। उसने यह बात मायके वालों को बताई। मायके वाले उसे लेकर करवा चौथ के दिन गोंदर पहुंचे। वहां पति के न मिलने पर उसने लोगों को सपने वाली बात बताई।
विज्ञापन
उसके बताए जगह पर लोगों ने देखा कि उसके पति का शव पड़ा है। उस दिन उसने करवा चौथ का व्रत रख रखा था, इसलिए उसने घर में अपने से बड़ी महिलाओं को करवा देना चाहा तो उन्होंने लेने से मना कर दिया। इससे व्यथित होकर वह करवा सहित जमीन में समा गई और उसने श्राप दिया कि यदि भविष्य में इस गांव की किसी बहू ने करवा चौथ का व्रत किया तो उसका सुहाग उजड़ जाएगा। तब से गांव में किसी ने व्रत नहीं रखा है।
काफी सालों बाद गोंदर में से कतलाहेड़ी और औंगद गांव अलग हुए। चूंकि उनके वंशज गोंदर के थे, इसलिए परंपरा यहां भी बरकरार रही। चौहान गौत्र की बहुओं ने इसके बाद कभी यह पर्व नहीं मनाया। हालांकि इन्हीं गांवों में अन्य बिरादरी की बहुएं इस पर्व को मनाती हैं।