पुरुषों से ज्यादा पैसा कमा रही हैं महिला बाउंसर
अभी तक बाउंसर के तौर पर पुरुषों की मांग अधिक होती थी। पर अब महिला बाउंसर की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। महिला बाउंसर की मांग अभिभावकों, इवेंट कंपनी, पब और रेस्त्रां सभी जगह बढ़ती जा रही है।
सिक्योरिटी एजेंट के मुताबिक देश भर में महिला बाउंसर की संख्या डेढ़ साल के भीतर बढ़कर 5,000 से ज्यादा पहुंच गई है। बेंगलुरू में ग्राहकों की तरफ से मिलने वाले फीडबैक के बाद मैनजमेंट ऑफ माइक्रोब्रूवेरी में महिला बाउंसर को तैनात किया जाएगा।
इकॉनामिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक एक फर्म के निदेशक वानीश्री प्रभु ने बताया कि अगर शहर के आंकड़ो पर ध्यान दे तो पता चलेगा कि शहर में महिलाओं के बीच में शराब पीने का चलने तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए महिलाओं को सही माहौल उपलब्ध कराने के लिए महिला बाउंसर को नौकरी पर रखना चाहता हूं। वानी श्री के मुताबिक वह हर तीन पुरूषों पर दो महिला बाउंसर को नियुक्त करना चाहते हैं।
सिक्योरिटी सर्विसेसज फर्म नीसा के बिजनेस डेवलपमेंट जीएम एड्रंयू रोड्रीज्यूस ने बताया कि वर्ष 2013 में फर्म के पास 200 महिला बाउंसर थी जिनकी संख्या बढ़कर अब 800 तक पहुंच गई है।
35,000 रुपए तक की कमाई
एक तरफ बहुत से प्रोफेशन में जहां महिलाओं को पुरूषों की तुलना में कम पैसे मिलते हैं। यहां पर महिला बाउंसर को पुरुषों की तुलना अधिक पैसा मिलता है। यहां पर हर शिफ्ट में 15,00-2,000 रुपए कमाई हो जाती है। वहीं पुरूषों को ऐसी शिफ्ट करने के लिए 800-1,200 रुपए ही मिलते हैं। एक शिफ्ट चार से आठ घंटे की होती है। एक महीने में महिलाएं 20,000-35,000 रुपए की कमाई कर लेती हैं।
दिल्ली स्थित शैडो सिक्योरिटी के मैनेजर ऑपरेशन करन सिंह रावत ने बताया कि हम महिला बाउंसर की तेजी से भर्ती कर रहे है। पिछले साल सिक्योरिटी टीम के 80 सदस्यों में से 16 बाउंसर महिलाएं थी। वहीं इस साल कुल 87 बाउंसर में महिला बाउंसर की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
38 वर्षीय महिला बाउंसर मिथिलेश कुमारी बताती है कि अधिकतर महिलाएं स्वतंत्र रूप से अलग-अलग बाउंसर के साथ काम करना पसंद करती हैं। मिथिलेश अपने काम के चलते लगातार हरिद्घार, मनाली, मुबंई की यात्रा करती रहती हैं।