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'पुलिस ने बस से उतार कर 7 ग्रामीणों को मारा'

Thu, 09 Apr 2015 02:16 PM IST
Updated Thu, 09 Apr 2015 02:16 PM IST
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witness claims 7 of 20 shot dead were picked up from bus

आंध्र प्रदेश में 20 कथित चंदन तस्करों को कथित मुठभेड़ में मार गिराने का मामला गहरा गया है। मुठभेड़ के खिलाफ तमिलाडु में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। तमिलनाडु के ही एक ग्रामीण ने दावा किया है कि उसने आंध्र प्रदेश पुलिस को मारे गए 20 लोगों में से 7 को एक बस में बैठाकर ले जाते देखा था।

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शेखर नाम के शख्स का दावा है कि आंध्र प्रदेश-तमिलानाडु के सीमावर्ती इलाके से आंध्र प्रदेश की पुलिस ने सात लोगों को उठाया था। शेखर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के वेट्टागिरिपलयम का निवासी है। गौरतलब है कि मंगलवार को आंध्र प्रदेश की चंदन तस्करी रोधी टास्क फोर्स ने शेषाचलम के जंगलों में तिरुपति के करीब 20 लोगों को मुठभेड़ में मार डाला था। दावा किया जा रहा है कि वे सभी लकड़हारे थे।
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पुलिस का कहना है कि चंदन तस्करों ने उन्हें चंदन के पेड़ों की कटाई के लिए अपने साथ लिया था। पुलिस से आमना-सामना होने पर उन्होंने हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में मारे गए।
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शेखर का दावा, उसके साथ बस में बैठे थे मारे गए लोग

witness claims 7 of 20 shot dead were picked up from bus

शेखर ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए 20 लोगों में से 7 उसके साथ बस में बैठे थे। सोमवार की शाम आंध्र प्रदेश की पुलिस ने बस रोकी और उन्हें उतार कर अपने साथ ले गए। शेखर के मुताबिक, वह एक महिला के बगल में बैठा था। पुलिस को लगा कि वह उसका पति है, इसलिए उसे छोड़ दिया।

वेट्टागि‌रिपलयम से सोमवार की दोपहर आठ ग्रामीण बस में बैठे थे, लेकिन मंगलवार को केवल शेखर ही लौट कर आया। आंध्र प्रदेश पुलिस ने मुठभेड़ के बाद उन सात का फोटो जारी किया।

कन्नमंगलम के डीएसपी ए मणि ने बताया कि मृतकों के परिजनों की तलाश उनके मोबाइल फोन से हो सकी। उन्होंने बताया कि मोबाइल कंपनियों को उन्होंने जो एड्रेस प्रूफ दिया था, उसी के आधार पर उनके गांव गए और एनकाउंटर की तस्वीरें द‌िखाकर उनके घर वालों की तलाश की। उन्होंने बताया‌ कि शेखर के बच जाने की खबर उन्हें भी थी, लेकिन पुलिस उससे संपर्क नहीं कर पाई।

शेखर ने रिश्तेदारों को दिया घटना का ब्योरा

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हालांकि शेखर के बचने की खबर तमिलनाडु में आग की तरह फैल गई। मीडिया ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह इतना डरा हुआ था कि उसने खुद को घर में बंद कर लिया और किसी से भी बात करने से मना कर दिया।

बहुत समझाने पर उसने एक तमिल चैनल से बात करने के लिए तैयार हुआ, हालांकि उसने उन्हें बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दी। बाद में अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों का उसने घटना का बारे में बताया।

शेखर ने उन्हें जो जानकारी दी, उसके मुताबिक, सभी आठ कन्नमंगलम से सोमवार को दो बजे के आसपास निकले और वेल्‍लोर के लिए बस पकड़ी। वहां से उन्होंने तिरुतन्नी के लिए एक और बस ली। उसने बताया‌ कि वह डी महेंद्रन नाम के एक शख्स के सा‌थ था, जो एक प्लंबर था और उसने वादा किया ‌था कि वह उसे बड़ई का काम दिलवा देगा।

बस रोककर पुलिस ने यात्रियों का उतारा

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वे सभी तिरुत्तनी 5.30 से 6 बजे के आसपास पहुंचे थे। तमिलनाडु-आंध्र के सीमवर्ती कस्बे तिरुत्तनी से उन्होंने आंध्रा के रेनीगुंटा के लिए बस पकड़ी। तिरुत्तनी से रेनीगुंटा के बीच का रास्ता एक घंटे का है।

बस में महेंद्रन खिड़की के बगल वाली सीट पर था। उसके बगल में एक अधेड़ महिला बैठी थी और उसके बगल में शेखर। आंध्र चेकपोस्ट से कुछ किलोमीटर पहले बस रोक दी गई। एक पुलिस टीम बस में आई और यात्रियों को उठाना शुरु कर दिया।

पुलिस ने महेंद्रन को भी उठा लिया, लेकिन शेखर को छोड़़ दिया। शेखर ने जैसा ग्रामीणों से बताया उसके मुताबिक, पुलिस ने उसे बगल में बैठी महिला का प‌ति समझ लिया। उसके साथ के सभी सात को बस से उतार लिया गया। और बस आगे चल दी। शेखर ने बताया कि अगले स्टॉप से वह बस से उतर गया।

पुलिस से अब भी डरा हुआ है शेखर

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शेखर ने बताया कि वहां से वह तिरुत्तनी वापस आया। वेल्‍लोर के लिए बस पकड़ी और कन्नमंगलम पहुंचा। जब वह कन्नमंगलम पहुंचा अगले दिन की सुबह हो चुकी थी। शेखर के एक रिश्तेदार ने बताया कि वहां से उसने टेक्सी ली और गांधी नगर चला गया।

शेखर के बड़े भाई और भाभी ने बताया कि वह बहुत डरा हुआ है, इसलिए वह अब तक छिप कर रह रहा है। उसे पुलिस से बहुत डर लग रहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार का रात पुलिस आई थी, उसके बाद वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ घर छोड़ कर चला गया।

शेखर का कहना है कि चाहे आंध्र की पुलिस हो या तमिलनाडु की, हमारे लिए सब बराबर है। उसे डर है कि मामले में पुलिस आगे भी कार्रवाई ना करे।

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