{"_id":"b3c64cd0-b8da-11e2-811c-d4ae52bc57c2","slug":"without-mulayam-try-to-make-third-front","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुलायम के बिना छिड़ेगी तीसरे मोर्चे की मुहिम","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
मुलायम के बिना छिड़ेगी तीसरे मोर्चे की मुहिम
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
Updated Fri, 10 May 2013 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बजट सत्र में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को साधने में नाकाम रहने के बाद वामदल अब चुनाव पूर्व तीसरे मोर्चे के गठन के लिए नए सिरे से प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
कर्नाटक में जेडी-एस को मिली ठीक ठाक सफलता को वामदल मजबूत तीसरे मोर्चे के गठन के लिए शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि वामदलों का आकलन है कि तीसरे मोर्चे की मुहिम में मुलायम अंत में हर हाल में जुड़ेंगे। मगर इससे पहले वामदल हर हाल में गैरएनडीए-गैरयूपीए दलों को जोड़ने की मुहिम शुरू कर देना चाहते हैं जिससे इसके लिए हड़बड़ी में तैयारी न शुरू करनी पड़े।
विज्ञापन
दरअसल बजट सत्र के दूसरे चरण में मुलायम को साधने के लिए वाम दलों ने बड़ी रणनीति बनाई थी। इनकी योजना अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव लाकर मुलायम को घेरने की थी।
विज्ञापन
तब वामदलों को लगा था कि कटौती प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में अगर सपा सरकार के साथ खड़ी रही तो उसका पर्दाफाश होगा। लेकिन अगर सपा कटौती प्रस्ताव के समर्थन में आई तो उसका सरकार से नाता टूटेगा और यहीं से चुनाव पूर्व तीसरे मोर्चे के गठन की शुरुआत हो जाएगी।
हालांकि हंगामे के कारण सदन के न चलने और वित्तीय कामकाज विपक्ष के वाकआउट के बीच निपट जाने से वामदलों की रणनीति पर पानी फिर गया। इसलिए अब नई परिस्थिति में वामदलों ने मुलायम के बिना ही गैरएनडीए और गैरयूपीए दलों को जोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर देने का मन बनाया है।
माकपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि जेडी-एस अध्यक्ष एचडी देवगौड़ा पहले से ही तीसरे मोर्चे के गठन के हिमायती है। टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू इसके लिए तैयार हैं। अब जरूरत बीजेडी, एआईएडीएमके सहित कई अन्य दलों से संपर्क साधने की है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही देवगौड़ा और चंद्रबाबू से संपर्क साधा जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि फिलहाल तीसरे मोर्चे के गठन में नींव की भूमिका निभाते रहने वाले मुलायम प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इस मुहिम से नहीं जुड़ेंगे। मगर यह भी तय है कि चुनाव नजदीक आते आते उन्हें हर हाल में तीसरी ताकत की छतरी के नीचे आना ही होगा।
वाम दलों को लालू प्रसाद की राजद और रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति के भी इस मुहिम में जुड़ने की उम्मीद है। इन्हें लगता है कि कांग्रेस से उम्मीद लगाए बैठे इन दोनों दलों को भी ठीक चुनाव से पहले झटका लगेगा और ये भी मुलायम की तरह एक छतरी के नीचे आएंगे।