पढ़िए, चाय पैदा करने वाले श्रमिकों की दर्द भरी दास्तां

Praveen Dwivedi Updated Mon, 01 Dec 2014 09:09 AM IST
without money how can bagaan workers survive?
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भारत में दार्जिलिंग चाय की कई मशहूर किस्में होती हैं। लेकिन हिमालय के दक्षिण में जहां घरेलू बाजार के लिए चाय उगाई जाती है, वहां अक्सर चाय बागान श्रमिक बेहद विकट स्थितियों में रहते हैं। चाय बागान के मजदूरों की विकट स्थितियां ही हैं जिसकी वजह से कभी-कभी प्रबंधन और मजदूरों के बीच हिंसा भी होती है।
कहीं-कहीं तो इन मजदूरों को महीनों-महीनों वेतन नहीं मिलता और न ही राशन दिया जाता है। हिमालय की तहलटी पर उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में बसे विशाल सोनाली चाय बागान में डरावना सन्नाटा है। इसके मालिक का बंगला खाली है और कहीं भी कोई मज़दूर नजर नहीं आ रहा।

पिछले हफ्ते ही चाय बागान के मालिक राजेश झुनझुनवाला को उनकी दो मंजिला पुती हुई इमारत से निकालकर गुस्साए कर्मचारियों ने चाय की झाड़ियों के बीच पीट-पीटकर मार डाला था।
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संघर्ष की जड़ आर्थिक है

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