अब चार साल के भीतर ही जान सकेंगे सूर्य से जुड़ी जानकारी
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सूर्य के बारे में विस्तृत जानकारियां हासिल करने में अभी और वक्त लग सकता है। इस बाबत विकसित किए जा रहे आदित्य एल वन उपग्रह की लॉन्चिंग में और चार साल लग सकते हैं। इसरो ने आदित्य एल वन के अलावा अन्य लंबित प्रोजेक्टों के पूरा करने की कार्ययोजना बनाई है।
अंतरिक्ष कार्यक्रम को और बढ़ावा दिए जाने के उद्देश्य से इसके लिए इस बार बजट राशि बढ़ाई जा सकती है। नए वित्तीय वर्ष में अंतरिक्ष कार्यक्रम पर लगभग नौ हजार करोड़ खर्च किए जाने की संभावना है। पिछले पांच साल से लंबित प्रोजेक्टों में चंद्रयान-2, जीआई सैट और रिसोर्स सैट 2 ए शामिल है।
जीसैट 14, जीसैट 15, जीसैट 16 और मंगल मिशन पूरा किया जा चुका है। मंगल मिशन -2 के लिए अभी विचार विमर्श ही चल रहा है। इसरो के सूत्रों के मुताबिक आदित्य एल वन मिशन के लिए 378 करोड़ 53 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें से 42.77 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। अबतक 22.77 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। प्रोजेक्ट के 2020 तक पूरा होने के आसार हैं।
लंबित प्रोजेक्टों का पूरा करने की बनाई कार्ययोजना
चंद्रयान -2 के लिए 603 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इसमें से 212 करोड़
45 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसी तरह जीआई सैट के लिए स्वीकृत 392 करोड़
में से अब तक 83.62 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। रिसोर्स सैट -2ए के
लिए 220 करोड़ स्वीकृत हैं। इस मद में अब तक 50.24 करोड़ रुपये ही खर्च
हुए हैं।
इसरो ने अंतरिक्ष कार्यक्रम में दुनिया भर में अहम स्थान हासिल
किया है। इस क्रम में नए वर्ष में आपदा प्रबंधन के लिए डाटा संग्रह
कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जाने वाली है ताकि आम लोगों को इस कार्यक्रम से
अधिक पायदा मिल सके।
सूत्रों ने बताया कि इसरो के नए प्रोजेक्टों से अब
प्राकृतिक संसाधनों की मॉनिटरिंग, मौसम संबंधी सूचनाएं, समुद्र विज्ञान
संबंधी आंकड़े में अधिक सटीक मिल सकेंगे। बाढ़ और तेल रिसाव संबंधी सूचनाएं
और कृषि के लिए उपयोगी डाटा के लिए सेटेलाइट के विकास पर इसरो की
प्राथमिकता है। अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए इस वर्ष 7238 करोड़ रुपये
निर्धारित हैं। इसमें से 5826 करोड़ का आवंटन हो चुका है।