धार्मिक हिंसा पर प्रधानमंत्री ने दिया बड़ा बयान
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार सेक्युलर शब्द को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। पीएम मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि धार्मिक हिंसा और असहिष्णुता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए धार्मिक हिंसा और असहिष्णुता पर अपनी बात रखी है। मोदी ने कहा कि मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश के सभी लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी हो। साथ ही बिना किसी दबाव के हर किसी को कोई भी धर्म अपनाने की आजादी हो। प्रधानमंत्री मोदी कुरिएकोस एलियास चवरा और मदर एयुफारसिया के संत पद पर होने वाली पदोन्नति के उत्सव में बोल रहे थे।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में किसी भी धर्म के किसी भी समूह को धर्म के आधार पर हिंसा की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मोदी ने इससे आगे बढ़कर कहा कि मेरी सरकार देश में किसी भी धार्मिक समूह को खुलेआम या फिर छिपकर किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि देश में 17 मई के बाद से भाजपा सरकार आने के बाद विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमले करता रहा है। भाजपा सरकार आने के बाद धार्मिक हिंसा बहुत तेजी से बढ़ी थी।
बराक ओबामा ने थी आलोचना
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा था कि भारत की धार्मिक असहिष्णुता का आलम यह है कि महात्मा गांधी देख लें तो स्तब्ध रह जाएंगे। अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में नरेंद्र मोदी की चुप्पी को खतरनाक बताया था।
आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे पर बोले। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक आस्था की पूरी आजादी है और हमारा मंत्र विकास है जिसके लिए एकता जरूरी है। पीएम के इस बयान पर कांग्रेस ने कहा है कि मोदी को ऐसे नेताओं और मंत्रियों पर भी नकेल कसनी चाहिए जिन्होंने धार्मिक हिंसा से जुड़े बयान दिए हैं। कांग्रेस नेता मीम अफजल ने कहा कि अगर पीएम ने यह बात कही है तो इसका स्वागत करना चाहिए, लेकिन हम उम्मीद करेंगे कि वह ऐसे बयान देने वाले नेताओं पर कार्रवाई भी करेंगे न कि उन्हें मंत्री बनाएंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद केवी थॉमस ने कहा कि वह प्रधानमंत्री है हमने देखना होगा कि वह जो बोले हैं वह सच हो जाए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि पीएम और उनकी सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। वक्त की जरूरत है कि मोदी सरकार संविधान के अनुसार काम करें।