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अजीम प्रेमजी बोले, मैं संघ के विचारों का समर्थक नहीं

Mon, 06 Apr 2015 12:08 PM IST
Updated Mon, 06 Apr 2015 12:08 PM IST
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wipro chairman Azim Premji says I dont endorse rss ideology

विप्रो चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के सा‌थ किसी कार्यक्रम में शामिल होने का कतई यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि वे उस संगठन के विचारों का समर्थन करते हैं।

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उन्होंने कहा है कि यह मतभेदों को स्वीकार कर साथ काम करने जैसा है।

अजीम प्रेमजी ने यह सफाई संघ से जुड़े एक संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने के मुद्दे पर दी है। प्रेमजी रविवार को संघ से जुड़े 'राष्‍ट्रीय सेवा भारती' एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे।

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संघ से जुड़ा संगठन है राष्ट्रीय सेवा भारती

wipro chairman Azim Premji says I dont endorse rss ideology

राष्ट्रीय सेवा भारती की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेवा संगम में बतौर मुख्य अतिथि प्रेमजी ने कहा कि आशंका जताई जा रही है कि संघ के कार्यक्रम में शामिल होने के मतलब उसकी विचारधारा का समर्थन करना है।

प्रेमजी ने कहा‌, 'मुझे कुछ लोगों ने ऐसी सलाह भी दी। हालांकि मैंने उनकी सलाह पर अमल नहीं किया। मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, और मुझे पता था कि यहां बोलने का अर्थ यह कतई नहीं कि मैं संगठन के विचारों का समर्थन किया।'

वैचारिक मतभेदों पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा, 'किसी विशेष मकसद को पूरा करने के लिए, हमें ऐसे लोगों के साथ भी मिल कर काम करना आना चाहिए, जिनसे हमारे मतभेद हैं।'

प्रेमजी ने कहा कि सभी एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास कर रहे हैं, जो भ्रष्‍टाचारमुक्त हो और सबके लिए समान अवसर हो।

भागवत बोले, संघ अपने काम को और विस्तार देगा

wipro chairman Azim Premji says I dont endorse rss ideology

प्रेम जी ने कहा कि बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में हम सभी को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करना चाहिए।

कार्यक्रम में जीएमआर ग्रुप के संचालक जीएम राव ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि हम समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। भविष्य को देखकर काम करना होगा, ताकि समाज में शांति और अमीर-गरीब का अंतर मिटाया जा सके। इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।

कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ अपने काम को और विस्तार देगा साथ ही सभी वर्गों की सेवा के लिए खुद को और ज्यादा संगठित करेगा। बकौल भागवत यह काम बिना किसी भेदभाव और नि:स्वार्थ तरीके से होगा।

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