ट्रेन के बीच में भी लगेगा इंजन, रिमोट से चलेगा
ट्रेन से देशभर के पहाड़ी क्षेत्रों का भ्रमण करने वाले यात्रियों को और सुरक्षित यात्रा का तोहफा देने की तैयारी डीरेका कर रहा है।
सब कुछ ठीक रहा तो पहाड़ी क्षेत्रों में चढ़ाई के दौरान इंजन से डिब्बों का संपर्क टूटने और पटरियों पर पहियों के फिसलने की घटना बीते जमाने की बात हो जाएगी। डीरेका ने इस समस्या का हल ट्रेन के बीच में भी एक इंजन लगाकर निकाला है।
पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाली ट्रेनों में सामान्यत: ट्रेन के अगले और पिछले छोर पर इंजन लगाए जाते थे। अब बीच में भी इंजन लगने के बाद कुल इंजनों की संख्या तीन हो जाएगी।
खास बात यह है कि ट्रेन के केवल आगे के इंजन में ही पायलट बैठेगा। वह रिमोट से बाकी के दो इंजनों को संचालित करेगा।
क्यों टूटता है डिब्बों से संपर्क?
ट्रेन में आगे, पीछे और बीच में लगने वाले तीनों इंजनों में सामंजस्य स्थापित करने पर डीरेका के इंजीनियर काम कर रहे हैं। इसके जल्द ही पूरे हो जाने की उम्मीद है।
पहाड़ी इलाकों में खड़ी चढ़ाई के दौरान रेल इंजन अपने पूरे जोर से डिब्बों को खींचता जरूर है लेकिन डिब्बे उसे पीछे की ओर खींचते हैं।
ऐसे में अगर ट्रेन के बीच में कोई जोड़ कमजोर पड़ता है तो वह खुल जाता है। इस समस्या से निबटने के लिए ट्रेन के पीछे भी इंजन लगाया जाता है। लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं था इसलिए ट्रेन के बीच में भी एक इंजन लगाने का तरीका खोजा गया।
डीरेका के उप महाप्रबंधक कुमार गुप्ता ने बताया, "तकनीकी को जल्द ही डीरेका विकसित कर लेगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रेन से यात्रा सुगम व सुरक्षित हो जाएगी।"