काशी के बदले सियासी समीकरण में किसके साथ होंगे मुसलिम?
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वाराणसी संसदीय सीट से मुख्तार अंसारी के चुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद अब अन्य दलों की नजर मुस्लिम मतों पर है।
कौमी एकता दल ने जहां साझा प्रत्याशी की अपील की है वहीं यह भी घोषणा की है कि जो मोदी को हराएगा, कौएद उसे समर्थन देगी। वहीं केजरीवाल ने इस संभावना को बल दिया कि कौएद वाराणसी में उनका समर्थन कर रहा है।
बदली स्थितियों में मुस्लिम मतों को अपने प्रत्याशी की झोली में डालने के लिए पार्टियों ने कवायद शुरू कर दी है। कोई मुस्लिम मतों पर मुख्तार का प्रभाव को खारिज कर रहा है तो किसी का कहना है कि केजरीवाल मुगालते में हैं।a
केजरीवाल को समर्थन पर असमंजस
वहीं केजरीवाल के बयान के विरोध में कौएद का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतहर जमाल लारी का कहना है कि पार्टी ने अभी किसी को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है।
बताते चलें कौएद ने गुरुवार को घोषणा की है कि मुख्तार अंसारी वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस घोषणा के बाद से मुस्लिम मतों को लेकर पार्टियों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
सूत्रों की मानें तो अभी कोई पार्टी यह नहीं दिखाना चाहती है कि मुख्तार के न लड़ने से उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। पार्टियों का दावा है कि उनके ही प्रत्याशी का मोदी से मुख्य मुकाबला है।
मोदी के लिए मुख्तार चुनौती!
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा का कहना है कि यहां अल्पसंख्यक समुदाय पहले से ही मुख्तार के विरोध में हैं। शर्मा का दावा है कि अल्पसंख्यक समाज का वोट कांग्रेस को मिलेगा क्योंकि वही मोदी के खिलाफ मजबूती से लड़ रही है।
कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का भी यही कहना है। साथ ही उन्होंने केजरीवाल मुगालते में होना बताया। सपा प्रत्याशी कैलाश चौरसिया का कहना है कि पार्टी अपनी नीतियों और सिद्धांतों पर चुनाव लड़ रही है।
सरकारी योजनाओं का लाभ क्षेत्र के एक लाख से ज्यादा लोगों को मिला है। हमारी लड़ाई वैसे ही मजबूत है। बिना मुख्तार का नाम लिए उन्होंने कहा कि किसी के चुनाव नहीं लड़ने से मतों को विभाजन रुकेगा। वह हमें समर्थन देता है तो उसके आभारी रहेंगे।