लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं केजरीवाल
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आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव में ताल ठोंक सकते हैं। उन्होंने इसका फैसला पार्टी पर छोड़ दिया है।
हालांकि उनकी सीट के बारे में पार्टी नेता एकमत नहीं है। पार्टी का एक धड़ा केजरीवाल को नई दिल्ली संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतरने की बात कर रहा है तो दूसरा धड़ा इन्हें भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ मैदान में देखना चाहता है।
फिलहाल इस पर अभी आखिरी फैसला नहीं हो सका है।
पहले चुनाव लड़ने से मना किया था
दरअसल, पिछले महीने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।
पार्टी के विधायक विनोद कुमार बिन्नी के बगावती तेवर दिखाने के बाद उन्होंने साफ किया था कि पार्टी किसी विधायक को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारेगी। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता इससे सहमत नहीं दिखे।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दो दिन पहले राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में इस पर चर्चा हुई थी। जिसमें पीएसी के ज्यादातर सदस्यों ने केजरीवाल के फैसले पर ऐतराज जताया।
लंबी चर्चा के बाद आखिर में केजरीवाल को झुकना पड़ा और उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पार्टी पर छोड़ दी।
सीट को लेकर भी चर्चा शुरू
वहीं, केजरीवाल को चुनाव मैदान में उतारने की कोशिश के बीच उनकी सीट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो पार्टी का एक धड़ा उन्हें नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारने की वकालत कर रहा है।
माना जा रहा है कि यह कोशिश मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में लामबंद करने में मददगार साबित होगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सही समय पर इसकी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
प्रचार अभियान पर निकलेंगे केजरीवाल
पार्टी सूत्रों की मानें तो फिलहाल अरविंद केजरीवाल की पहली प्राथमिकता दिल्ली सरकार है।
लोकसभा चुनाव का ऐलान होने के बाद ही वह प्रचार अभियान पर निकलेंगे। इसकी वजह यह बताई गई है कि इस बीच दिल्ली सरकार अपनी सभी प्रस्तावित योजनाओं को शुरू कर चुकी होगी।
वहीं, दिल्ली की जिम्मेदारियों को छोड़कर चुनाव प्रचार करने का आरोप भी केजरीवाल पर नहीं लगेगा। दिल्ली सरकार के दो महीने के कार्यों की दलील देते हुए वह मजबूती से अपने प्रचार अभियान को आगे बढ़ा सकते हैं।