क्या मोदी से मुकाबला कर पाएंगी प्रियंका?
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विधानसभा चुनावों की करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस हार की धूल झाड़कर आगामी लोकसभा चुनावों के लिए कमर कसना चाहती है और सेनापति का मुकुट राहुल गांधी के सिर रखने की तैयारी है। लेकिन पार्टी के पास तुरुप का ऐसा इक्का है, जिसे अब तक पूरी तरह कभी इस्तेमाल नहीं किया गया- प्रियंका गांधी।
राहुल गांधी की बहन और देखने से लेकर हाव-भाव में तक इंदिरा गांधी का अक्स रखने वाली प्रियंका मंगलवार शाम से चर्चा में आईं, जब उन्होंने कांग्रेसी नेताओं के साथ एक बैठक की, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी, दोनों मौजूद नहीं थे।
ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता और अरविंद केजरीवाल की ओर से मिली नई चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस प्रियंका गांधी को मैदान में उतार सकती हैं। प्रियंका कमाल भी कर सकती हैं, जानिए क्यों?
प्रियंका गांधी खुद उतरीं मैदान में!
कांग्रेस की चुनावी तैयारियों और राहुल गांधी के प्रमोशन के ऐलान की चर्चाओं के बीच प्रियंका गांधी वाड्रा ने पर्दे के पीछे से प्रबंधन की कमान थामने के संकेत दे दिए हैं। मंगलवार को राहुल की गैरमौजूदगी में उनके घर पर प्रियंका ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ बैठक की।
राहुल की उम्मीदवारी को लेकर चल रही गहमागहमी को प्रियंका की सक्रियता ने मजबूती दे दी है। राहुल की बहन के बढ़ते कदमों के साथ ही 2014 की चुनावी जंग से पहले कांग्रेस में बड़े बदलाव की दशा और दिशा तैयार हो गई है। इसके तहत पार्टी के महासचिवों दिग्विजय सिंह, शकील अहमद, मधुसूदन मिस्त्री, अंबिका सोनी और मुकुल वासनिक को चुनाव लड़ाने की बात है।
कांग्रेसी नेता प्रियंका की सक्रियता को सामान्य बता रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि प्रियंका गांधी अहम राजनीतिक परिवार की सदस्य हैं। वह कांग्रेस पार्टी की सक्रिय सदस्य हैं। प्रियंका अमेठी और रायबरेली में चुनाव का काम देखती हैं।
दिल्ली की हार ने किया मजबूर!
दिल्ली के चुनावों में उलटफेर करने वाली आम आदमी पार्टी से अब प्रियंका गांधी भी सतर्क हो गई हैं। प्रियंका ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में आप के सोनिया और राहुल के संसदीय क्षेत्र में बढ़ते कदमों को लेकर चर्चा की।
प्रियंका ने खुद के दौरे बढ़ाने के साथ ही इस संबंध में एक योजना तैयार करने के लिए कहा है। दोनों संसदीय क्षेत्रों में चुनाव से पहले प्रियंका विकास की प्रक्रिया को तेज गति देना चाहती हैं। अपनी मां और भाई की विरोधी पार्टियों की घेरेबंदी की चुनौतियों को देखते हुए प्रियंका खास तौर पर चुनाव से पहले अलर्ट हैं।
कांग्रेस में चर्चा है कि इन बैठकों से पहले प्रियंका गांधी की सक्रियता से संकेत यही जा रहा है कि भाई को पीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट करने से पहले वह सभी नफे नुकसान का आकलन करना चाहती हैं। प्रियंका के साथ बैठक में शामिल होने वाले नेता खुलकर कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं।
प्रियंका करेंगी मोदी से मुकाबला!
भाजपा खम ठोंककर कहती रही कि उसके पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गांधी कहीं नहीं ठहरते। कांग्रेस में भी एक धड़ा मानता है कि इस बात में दम है, क्योंकि राहुल गांधी भले एंग्री यंग मैन का रुतबा रखते हों, लेकिन रैलियों में अपने भाषण से लोगों को बांधने की कला उनके पास नहीं है।
ऐसे में अगर प्रियंका गांधी को सक्रिय तौर पर राहुल की मदद के लिए मोदी के खिलाफ उतारा जाएगा, तो खेल दिलचस्प हो जाएगा। प्रियंका, राहुल की तुलना में बेहतर वाकपटुता रखती हैं और देश के ग्रामीण इलाकों में उनकी पैठ अब भी साफ दिखती है।
भाजपा दावा करती रही है कि मोदी में एक तरह का करिश्मा है। कांग्रेस में सोनिया गांधी के बाद अगर किसी चेहरे में इस तरह का करिश्मा दिखता है, तो वह प्रियंका हो सकती हैं। मोदी की टक्कर में अगर उन्हें उतारा जाता है, तो इससे राहुल गांधी को वाकई फायदा हो सकता है।
प्रियंका में हैं मास अपील!
नरेंद्र मोदी की तरह प्रियंका गांधी में मास अपील भी दिखती है। वह शहरी इलाकों में जाना-पहचाना चेहरा तो हैं, साथ ही देश के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी उन्हें काफी पसंद किया जाता है।
राजनीतिक विरोधी भी मानते हैं कि कांग्रेस के लिए राहुल से कहीं ज्यादा अच्छा विकल्प प्रियंका गांधी साबित हो सकती हैं। हालांकि, अभी तक वह कांग्रेस की तरफ से सक्रिय भूमिका में दिखी नहीं हैं। अमेठी और रायबरेली में वह अपने भाई और मां के लिए चुनाव प्रचार करती रही हैं, लेकिन इसके बाहर वह सक्रिय नहीं दिखीं।
कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि अगर प्रियंका इन दो लोकसभा क्षेत्रों से बाहर भी कामकाज संभालें, तो उसके पक्ष में बयार बह सकती है। जाहिर है, यही वजह है कि कांग्रेस इन दिनों मुसीबत में है और राहुल की मदद के लिए प्रियंका सामने आ गई हैं।
इंदिरा गांधी की झलक
प्रियंका गांधी का पहनावा, बालों का स्टाइल, बातचीत करने का तरीका और आचार-व्यवहार हूबहू इंदिरा गांधी से मेल खाता है। वह दिल्ली में भले वेस्टर्न परिधानों में नजर आए, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंदिरा जैसी साड़ी में ही दिखती हैं। और देश के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां आज भी इंदिरा गांधी के नाम पर कांग्रेस को वोट मिलते हैं।
प्रचार के दौरान भी देखा गया कि प्रियंका गांधी किस तरह महिलाओं के बीच में पहुंच जाती हैं। उनके कंधे पर हाथ रखकर बातचीत आगे बढ़ाती हैं। इंदिरा गांधी के भाषण की झलक भी प्रियंका में देखी जा सकती है।
जाहिर है, लोकसभा चुनावों में दांव बड़ा लगा होगा और ऐसे में प्रियंका के करिश्माई व्यक्तित्व का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। मोदी के खिलाफ कांग्रेस अपने सारे हथियार आजमाएगी और प्रियंका उसके तरकश का सबसे धारदार तीर साबित हो सकता है।
महिलाओं, नौजवानों के बीच क्रेज
जिन दो तबकों पर चुनावों के नतीजे काफी हद तक निर्भर करते हैं, उनमें महिलाएं और नौजवान शामिल हैं। इत्तफाक से प्रियंका गांधी, इन दोनों समूहों में अच्छी पैठ रखती हैं। महिलाएं उनमें इंदिरा गांधी को तलाशती हैं और युवा उनमें एक नौजवान-वाइब्रेंट नेता देखते हैं।
जाहिर है, आगामी चुनावों से पहले जिस तरह का माहौल देश में बना हुआ है, केवल राहुल गांधी के मैदान में उतरकर मुकाबला करना मुश्किल होगा। ऐसे में अगर प्रियंका का साथ मिला, तो कांग्रेस कुछ वोट बचा सकती है।
उत्तर भारत में प्रियंका गांधी का रुतबा खास है और कांग्रेस को अच्छी तरह पता है कि वह तुरुप का इक्का साबित हो सकती हैं। हालांकि, अभी यह पूरी तरह तय नहीं है कि उन्हें किस भूमिका में इस्तेमाल किया जाएगा।
नेताओं, कार्यकर्ताओं में दीवानगी
कांग्रेस में यह बात किसी से नहीं छिपी कि जो जलवा राहुल गांधी का है, वही या उससे कुछ ज्यादा प्रियंका गांधी का है। अगर चुनावों से पहले कमान संभालने में वह भी हाथ बंटाती हैं, तो पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका जा सकता है।
विधानसभा चुनावों की हार के जख्म सहला रही कांग्रेस को इस वक्त संजीवनी चाहिए और प्रियंका उसका इंतजाम कर सकती हैं, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं में उन्हें लेकर गजब का उत्साह है और नेताओं के बीच जोरदार सम्मान है।
हालांकि, इस बात का डर जरूर है कि अगर प्रियंका मैदान में उतरीं, तो भाजपा समेत सभी विपक्षी दल उन्हें भी निशाने पर लेंगे और ऐसी सूरत में उनके पति रॉबर्ट वॉड्रा के दामन पर लगे दाग उनके खिलाफ प्रचार में काम आएंगे।