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ऑनलाइन देख सकेंगे कहां चोरी हुई कितनी बिजली
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Mon, 12 Nov 2012 08:11 AM IST
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फेसबुक पर जिस तरह से ऑनलाइन चैटिंग की जा सकती है, उसी तरह से अब शहरों में हो रही बिजली चोरी को भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा। केंद्र सरकार की पहल पर देशभर के सभी 1400 शहरों की बिजली कुंडली तैयार हो रही है। पहले चरण में 35 शहरों में काम पूरा हो चुका है।
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इन शहरों में उत्तराखंड के भी दो शहर हैं, विकास नगर और ऋषिकेश। गुजरात ने इस मामले में भी बाजी मारी है। पहले चरण के 35 शहरों में से आधे से ज्यादा गुजरात के हैं। सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने में गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल व फिर उत्तराखंड रहे हैं।
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इसके तहत नए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से इन शहरों में इस बात का बैठे-बैठे पता चल जाएगा कि किस इलाके में कितनी बिजली जा रही है और कितनी बिजली चोरी हो रही है। इन शहरों में बिजली संबंधी डाटा केंद्र तैयार किया गया है। प्रत्येक उपभोक्ता को लेकर भी डाटा तैयार किया गया है। अब दूसरे चरण में 209 शहरों व कसबों में इस योजना पर अमल का काम शुरू हो गया है। आज भी पूरे देश में लगभग 35 फीसदी बिजली की चोरी अथवा क्षति हो रही है।
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केंद्र सरकार के उपक्रम पीएफसी के निदेशक एमके गोयल के अनुसार विद्युत मंत्रालय अपनी विस्तारित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम के तहत राज्यों को इस योजना के लिए पैसा दे रहा है। जिस तेजी से राज्य इस योजना में दिलचस्पी लेंगे, उसी हिसाब से इस पर अमल होगा।
केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये रखे थे, लेकिन यह काम लगभग आठ हजार करोड़ रुपये में पूरा हो जाने की उम्मीद है। पहला चरण वैसे तो अप्रैल 2010 में शुरू हो गया था, लेकिन इस पर अमल करने में लंबा समय लग गया।
खामियों को दूर करने में मिलेगी मदद
सरकार का मानना है कि सभी शहरों और कसबों में बिजली डाटा केंद्र तैयार हो जाने के बाद बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी। डाटा केंद्र तैयार हो जाने के बाद आसानी से बिजली चोरी और क्षति का पता लग जाएगा। साथ ही यह भी पता लग जाएगा कि बिजली की क्षति किन कारणों से हो रही है। इससे बाद खामियों को दूर करने की कोशिश होगी।