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क्या कुर्सी बचा पाएंगे कानून मंत्री?
अखिलेश श्रीवास्तव
Updated Fri, 03 May 2013 06:31 PM IST
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सीबीआई के मसले पर कोर्ट में सरकार की किरकिरी करा चुके कानून मंत्री अश्विनी कुमार को अब विपक्ष के साथ-साथ अपनों ने भी घेर लिया है। एक के बाद एक गलतबयानी के बाद कानून मंत्री अब चौतरफा घिर गए हैं।
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प्राइम टाइम में टीवी चैनलों पर जो नेता, सरकार और पार्टी को हर मसले पर डिफेंड करता दिखाई देता था आज वो अपनी कुर्सी बचाने के लिए सबसे ज्याद असहाय दिखाई दे रहा है।
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जिस काबिलियत के दम पर उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया था, वही चतुराई उन पर भारी पड़ती नजर आ रही है।
सीबीआई के मसले पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार और अपनों की दुत्कार के बाद कानून मंत्री अश्विनी कुमार की कुर्सी खतरे में पड़ गई है।
अदालत में तो सरकार किरकिरी झेल ही रही है विपक्ष ने भी तीखे तेवर अपनाकर कांग्रेस को निशाने पर ले लिया है।
कांग्रेस चाहती है कि इस पूरे मसले पर पीएम की छवि साफ-सुथरी बनी रहे और कम से कम पॉलिटिकल डैमेज हो, इसके लिए वो अश्विनी कुमार की बलि लेने के लिए तैयार दिखाई दे रही है।
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अपनों ने साथ छोड़ा
पार्टी के अंदर खुद को दरकिनार होते देख अश्विनी कुमार अपनी कुर्सी बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वो हर उस दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, जहां से उनकी कुर्सी और साख बच सकती है।
इस सिलसिले में वे बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सरकार के सहयोगियों से मिले। बैठक में कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी, केंद्रीय मंत्री पवन बंसल, जयराम रमेश, जयंती नटराजन, मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला और पार्टी के प्रवक्ता संदीप दीक्षित, पीसी चाको, रेणुका चौधरी, राशिद अल्वी और गिरिजा व्यास शामिल थीं।
सभी नेताओं ने सहानुभूति जताने के बजाय उन्हें घेर लिया और संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण देने का दबाव डाला। इस बारे में जब अश्वनी कुमार ने ये सफाई दी कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है तो एक और मंत्री ने कहा कि आप संसदीय विशेषाधिकार के तहत ऐसा कर सकते हैं। इस पर अश्विनी कुमार ने कहा कि ऐसा करने के लिए वे तभी राजी होंगे जब हाईकमान उन्हें ऐसा करने का आदेश दें। अश्विनी कुमार अपने पार्टी सहयोगियों से चाहते हैं कि उनका भी संसद के अंदर और बाहर जोरदार तरीके से बचाव किया जाए जबकि ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है।
एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण बिल इस सत्र में सरकार के शीर्ष एजेंडे में हैं और इस घटनाक्रम से पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर गई। विपक्ष के हंगामे के चलते कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अभी भी अड़े अश्विनी
पार्टी के साथियों से मुलाकात में उन्होंने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर से मुलाकात कर उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जब अरुण जेटली कानून मंत्री थे तो वे भी सीबीआई डायरेक्टर से मिलते थे। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक आका की तरह सीबीआई डायरेक्टर से नहीं मिले थे, उन्होंने कहा कि सीबीआई कार्मिक मंत्रालय के अधीन आती है। अश्विनी कुमार ने तो एटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती के लिए दोषी ठहरा दिया और कहा कि वे ही सीबीआई डायरेक्टर को उनके कमरे में लेकर आए थे।
कौन सच्चा, कौन झूठा?
इस बीच सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा ने अंग्रेजी अखबार इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत में यह कहकर अश्विनी कुमार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं कि अश्विनी कुमार ने ही ड्राफ्ट स्टेट्स रिपोर्ट दिखाने के लिए उन्हें पांच मार्च को अपने दफ्तर में बुलाया था। सिन्हा ने अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल हरीन रावल पर इस बारे में कोर्ट में गलत बयानी का आरोप लगाया कि मंत्री ने कोई रिपोर्ट नहीं देखी। इससे पहले कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक में अश्विनी कुमार ने कहा था कि उन्होंने सीबीआई डायरेक्टर को नहीं बुलाया था।
मेल टुडे को दिए गए इंटरव्यू में रंजीत सिन्हा ने कहा कि इस मसले का जो भी परिणाम निकलेगा उससे सीबीआई की स्वतंत्रता का एक नया मानक तैयार होगा। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में सीबीआई को स्वतंत्र करना है तो इसकी कार्यशैली में और कुछ संरचनात्मक बदलाव करने होंगे। जब उनसे ये पूछा गया कि क्या मंत्री की सलाह पर कोलगेट ड्राफ्ट रिपोर्ट में कोई बदलाव किया गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में वो छह मई को कोर्ट में ही बताएंगे।
सीवीसी, सीबीआई की सुपरवाइजर, कानून मंत्रालय नहीं
सीबीआई मैनुअल सरकार के उस दावे को सिरे से खारिज करता है कि जिसमें उसने कहा है कि ड्राफ्ट स्टेट्स रिपोर्ट देखकर उसने कुछ भी गलत नहीं किया। सीबीआई के पूर्व अधिकारियों, वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों की राय में सीबीआई के मैनुअल के मुताबिक सीबीआई केंद्र सरकार के अधीन तो है लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आने वाले भ्रष्टाचार केस की जांच को सुपरावाइज करने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी सीवीसी ही अधिकृत है।
इस मसले पर सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा का कहना है कि रिपोर्ट इसलिए सीवीसी के साथ साझा नहीं की गई क्योंकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। उनका दावा है कि ऐसी कोई लिखित गाइडलाइंस नहीं है कि वो कोर्ट की निगरानी वाले किसी केस की स्टेट्स रिपोर्ट सरकार को दिखाएं।
संदर्भ-
Ashwani Kumar knocking on all doors to keep his job