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एंटनी ने संजय गांधी को समर्थन से किया था इंकार
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Wed, 10 Apr 2013 12:44 AM IST
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विकीलीक्स ने दावा किया है कि कांग्रेस में प्रियरंजन दासमुंशी के अलावा एके एंटनी ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने 1976 में आपातकाल के दौरान संजय गांधी की सीधे-सीधे आलोचना की थी।
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जबकि संजय गांधी उस समय राजनीति में बेहद ताकतवर शख्सियत थे।
तत्कालीन केरल प्रदेश अध्यक्ष एंटनी के गुट ने संजय का समर्थन करने से इंकार करते हुए सत्ता में उनके तेजी बढ़ते कद पर यह कहते हुए सवाल उठाए थे कि आखिर संजय ने देश और पार्टी के लिए क्या बलिदान दिया है।
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अमेरिकी राजनयिकों की ओर से भेजे गए संदेशों के मुताबिक 1976 में गुवाहाटी में कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के सम्मेलन में संजय गांधी आकर्षण का मुख्य केंद्र थे।
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वह कांग्रेस में अपनी मां इंदिरा गांधी के बाद नंबर दो पर माने जाते थे, लेकिन संजय तेजी से आगे बढ़ने की कोशिशें जुटे हुए थे।
इसमें कहा गया है कि संजय गांधी के प्रशंसकों की बढ़ी संख्या के बावजूद यूथ कांग्रेस की सदस्यता की गुणवत्ता में कोई खास सुधार आने के कोई सुबूत नहीं थे।
एके एंटनी ने सीधे सपाट शब्दों में नई यूथ कांग्रेस और संजय की आलोचना की थी। उनके दूसरे आलोचक पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता प्रियरंजन दासमुंशी थे।
संदेश में कहा गया है कि 1977 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाखुशी का माहौल था। एक अन्य संदेश में कहा गया था कि केरल में संजय गांधी लोकप्रिय नहीं थे।
संदेश के मुताबिक के करुणाकरन का गुट तो संजय का समर्थन करता था, लेकिन एंटनी गुट नहीं। संजय की नीतियां केरल में लोकप्रिय नहीं थीं।
मनमोहन सिंह का प्रशंसक
अमेरिका 40 वर्ष पहले से ही मनमोहन सिंह का मुरीद है। अमेरिकी राजनयिकों ने उन्हें एक बेहतरीन अर्थशास्त्री और सुलझी हुई शख्सियत माना था।
मनमोहन जब नवंबर, 1975 में वित्त मंत्रालय में सचिव नियुक्त हुए तब दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने उनके बारे में प्रशंसा भरा नोट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भेजा जिसमें कहा गया था कि नवनियुक्त सचिव आर्थिक विकास से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञ हैं तथा मुक्त व्यापार नीति के समर्थक हैं।
विकीलीक्स ने यह खुलासा किया है। संदेश में मनमोहन के बारे में व्यक्तिगत जानकारी के साथ ही उनके शैक्षिक और पेशेवर अनुभवों का भी जिक्र है।
जजों का प्रोफाइल बनाया था
दिल्ली में तैनात अमेरिकी राजनयिकों ने आपात्काल के दौर में इंदिरा गांधी के चुनाव संबंधी मुकदमे की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ के प्रत्येक न्यायाधीश के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंगर को जानकारी मुहैया कराई थी।
विकीलीक्स के मुताबिक अगस्त 1975 में भेजे संदेश में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एएन राय की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ के सदस्य न्यायाधीशों के बारे में जानकारी है। पीठ के अन्य न्यायाधीश थे, एचआर खन्ना, एमएच बेग, केके मैथ्यू और वाईवी चंद्रचूढ़।
अमेरिकी राजनयिकों ने यह मत व्यक्त किया था कि इस पीठ के पांच में से चार न्यायाधीश सरकार के प्रति वफादार हैं।
मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का रायबरेली सीट से निर्वाचन अवैध घोषित कर दिया था जिसके बाद के घटनाक्रम में देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था।
इंदिरा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 7 नवंबर,1975 को सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा के पक्ष में फैसला देते हुए उनके निर्वाचन को वैध ठहराया था।