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वाइ-फाई से लैस गुजरात का मॉडल विलेज

Sat, 13 Sep 2014 01:56 PM IST
जुबैर अहमद/बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद
जुबैर अहमद/बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद Updated Sat, 13 Sep 2014 01:56 PM IST
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wifi gujrat village model.

गुजरात मॉडल की इतनी चर्चा के बाद भी ये बहस कभी रुकी नहीं कि यह मॉडल है क्या लेकिन अहमदाबाद से कुछ ही दूरी पर स्थित एक गांव मॉडल विलेज का नमूना बन गया है।

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इसे मॉडल विलेज बनाने का काम नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में ही शुरू हुआ था। भारतीय गांवों की मान्य तस्वीर के उलट यहां बिजली, स्वच्छ पेय जल, पानी की निकासी आदि की पूरी व्यवस्था है।
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गांव के प्राइमरी स्कूलों में कम्प्यूटर है और पूरे गांव में वाईफाई की सुविधा है। जब आप भारत के किसी गांव की कल्पना करते हैं तो आम तौर पर क्या सोचते हैं: कच्चे मकान, तंग और गंदी गलियां, नाली, पानी और बिजली की सुविधाओं का न होना।
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लेकिन गुजरात में पुनसारी गांव में शहर की सभी सुविधाएं हैं, हालांकि रूप गांव का ही है। देश का पहला ऐसा गांव अहमदाबाद से 90 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसे मॉडल विलेज (गांव) कहा जा रहा है।

इस गांव के सरपंच हिमांशु पटेल कहते हैं छह हजार की आबादी वाले उनके गांव के हर घर में बिजली और पानी की सुविधा है। यहां पानी के निकासी की व्यवस्था भी है।

यहां पीने के मिनरल वॉटर (पानी) का भी अलग से इंतजाम है। इसके इलावा ये एक स्मार्ट विलेज भी है।

वाई-फाई और सीसीटीवी

wifi gujrat village model.

पटेल कहते हैं, "पूरे गांव में वाई-फाई है, सीसीटीवी कैमरे जगह-जगह पर लगे हैं।" गांव की गतिविधियों को हिमांशु अपने दफ्तर के एक बड़े स्क्रीन पर भी देख सकते हैं और अपने स्मार्टफोन के स्क्रीन पर भी।

यहां लाउडस्पीकर्स भी लगे हैं। मुझसे पहले गांव की सुविधाओं का जायजा लेने तमिलनाडु के मुख्य सचिव भी आए थे, जिसका प्रसारण पटेल ने अपने दफ्तर में बैठकर किया।

पूरे गांव में जगह-जगह पर 150 लाउडस्पीकर्स लगे हैं, इनसे सरपंच की घोषणा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

स्मार्ट विलेज के सरपंच पटेल भी स्मार्ट हैं। उनके पास आइफोन 5 है, जिसके स्क्रीन पर गाँव की सुविधाओं की सूचना से संबंधित अप्लिकेशन्स हैं।

इसे मॉडल विलेज इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यहां के दो प्राइमरी स्कूल भी स्मार्ट स्कूल हैं। हिमांशु अपने दफ्तर के अंदर एक बड़े स्क्रीन पर इस सरकारी स्कूल को भी मॉनिटर कर रहे थे।

स्मार्ट स्कूलों की शुरुआत

wifi gujrat village model.

इसके बाद गर्व से वह इस स्कूल की लाइव तस्वीरों को अपने फ़ोन की स्क्रीन पर भी दिखाते हैं।

स्कूल की प्रिंसिपल भगवत बहन पटेल बताती हैं कि ये स्मार्ट स्कूल क्यों है, ''यहां कोई विद्यार्थी बीच में पढाई नहीं छोडता और यहां परीक्षाओं के नतीजे सबसे अच्छे होते हैं।"

ये स्मार्ट स्कूल इसलिए भी है क्योंकि यहां छोटे बच्चों को कंप्यूटर ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाती है। एक बच्चे ने मुझे इसका इस्तेमाल करके ये बताना चाहा कि कंप्यूटर के इस्तेमाल में वह माहिर है।

इस लड़के की कक्षा में 15 विद्यार्थी थे और कंप्यूटरों की संख्या भी लगभग उतनी ही थी। ऐसा मैंने किसी गांव के स्कूल में पहले कभी नहीं देखा।

सरपंच कहते हैं, ''सन् 2006 में उस समय के मुख्यमंत्री और अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इस गांव को स्मार्ट विलेज बनाने का काम शुरू हुआ था।''

यहां का पलायन रुका

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अब तक इसे स्मार्ट बनाने में कितने पैसे खर्च किए गए हैं? हिमांशु कहते हैं, ''वर्ष 2006 से 2012 तक सभी योजनाओं में 14 करोड़ रुपए खर्च आए और ये सभी पैसे राज्य और केंद्रीय सरकारों की ग्रामीण योजनाओं से आए।"

इस गांव ने ये साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के सही इस्तेमाल से देश के दूसरे गांव भी प्रगति कर सकते हैं। मॉडल या स्मार्ट गांव बन सकते हैं।

पुनसी स्मार्ट विलेज का उद्देश्य था गांव से रोज़ी रोटी के लिए शहरों को जाने के सिलसिले को रोकना। हिमांशु कहते हैं, ''अब तो लोग गांव को वापस लौट रहे हैं। अब तक 20 परिवार मुंबई से वापस गांव लौट चुके हैं।''

अब जिस तरह से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने इस गांव में दिलचस्पी दिखाई है उससे ये उम्मीद बंधी है कि देश भर में स्मार्ट गांवों की संख्या बढ़ेगी।

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